पाकिस्तान: इस्लामाबाद में स्थानीय निकाय चुनाव फिर टलने के आसार, कैबिनेट संशोधनों से बढ़ी अनिश्चितता

Story by  एटीवी | Published by  [email protected] | Date 03-01-2026
Pakistan: Local body elections in Islamabad likely to be postponed again, uncertainty increases due to cabinet amendments.
Pakistan: Local body elections in Islamabad likely to be postponed again, uncertainty increases due to cabinet amendments.

 

इस्लामाबाद

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में स्थानीय निकाय चुनाव एक बार फिर टल सकते हैं। यदि ऐसा होता है, तो यह लगातार पांचवीं बार होगा जब चुनावों को स्थगित किया जाएगा। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, संघीय कैबिनेट ने स्थानीय सरकार अधिनियम, 2015 में कई अहम संशोधनों को मंजूरी दे दी है, जिससे 15 फरवरी को प्रस्तावित चुनाव कराना व्यावहारिक रूप से मुश्किल हो गया है।

डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, कैबिनेट ने कानून में 14 संशोधनों को मंजूरी दी है। इनमें सबसे बड़ा बदलाव मेट्रोपॉलिटन कॉरपोरेशन इस्लामाबाद को समाप्त कर उसकी जगह तीन टाउन कॉरपोरेशनों की स्थापना का है। नए ढांचे के तहत इस्लामाबाद को तीन हिस्सों में बांटा जाएगा, जिनमें से प्रत्येक का दायरा राजधानी की तीन नेशनल असेंबली सीटों की सीमाओं के अनुरूप होगा।

कैबिनेट बैठक के बाद जारी आधिकारिक बयान में कहा गया कि 30 दिसंबर 2025 को कैबिनेट कमेटी फॉर लेजिस्लेटिव केसिज़ में लिए गए फैसलों को मंजूरी दे दी गई है, जिनमें इस्लामाबाद कैपिटल टेरिटरी लोकल गवर्नमेंट (संशोधन) अध्यादेश, 2025 से जुड़ी कार्रवाई की पुष्टि भी शामिल है।

हालांकि, Election Commission of Pakistan (ईसीपी) ने अभी औपचारिक रूप से चुनाव स्थगित करने की घोषणा नहीं की है, लेकिन नए संशोधनों के बाद फरवरी में चुनाव कराए जाने को लेकर गंभीर संदेह पैदा हो गया है। जब पिछले महीने ईसीपी ने चुनाव कार्यक्रम घोषित किया था, तब Pakistan Tehreek-i-Insaf (पीटीआई) की इस्लामाबाद इकाई ने दावा किया था कि सरकार फरवरी में चुनाव टाल देगी। हालांकि, Pakistan Muslim League-Nawaz (पीएमएल-एन) के स्थानीय नेतृत्व ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा था कि कानून में संशोधन बेहतर सेवा व्यवस्था के लिए जरूरी हैं और पार्टी पिछली बार की तरह फिर जीत दर्ज करेगी।

इस्लामाबाद की पिछली स्थानीय सरकार का कार्यकाल फरवरी 2021 में समाप्त हो गया था। तब से अब तक चुनाव बार-बार टाले जाते रहे हैं। इसके चलते राजधानी के लगभग 25 लाख नागरिक पानी की कमी, खराब सड़कों और बुनियादी सुविधाओं की बदहाली जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं।

ईसीपी ने कई बार परिसीमन किया और चुनाव कार्यक्रम घोषित किए, लेकिन हर बार किसी न किसी वजह से उन्हें वापस लेना पड़ा। एक बार तो मतदान से ठीक एक दिन पहले चुनाव रद्द कर दिए गए थे। 2021 में जब स्थानीय सरकार का कार्यकाल खत्म हुआ, तब पीटीआई सत्ता में थी और कानून के तहत 120 दिनों के भीतर चुनाव कराना जरूरी था, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। बाद में पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (पीडीएम) सरकार के कार्यकाल में भी यूनियन काउंसिलों की संख्या को लेकर मतभेदों के चलते प्रक्रिया अटकी रही।

गौरतलब है कि इस्लामाबाद में अब तक सिर्फ एक बार, 2015-16 में स्थानीय निकाय चुनाव हुए थे, जिनमें पीएमएल-एन विजयी रही थी और शेख अंसर अज़ीज़ मेयर बने थे। उस समय राजधानी में केवल 50 यूनियन काउंसिल थीं। अब बार-बार बदलते ढांचे और संशोधनों के चलते एक बार फिर लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं।