वॉशिंगटन डीसी।
ईरान में जारी अभूतपूर्व सरकार-विरोधी प्रदर्शनों के बीच इज़राइल ने खुलकर प्रदर्शनकारियों के समर्थन का संकेत दिया है। इज़राइल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने ईरान में हो रहे विरोध प्रदर्शनों को जनता का “स्वतंत्रता के लिए संघर्ष” बताते हुए कहा कि इज़राइल ईरानी लोगों के साथ खड़ा है। उनके इस बयान के बाद क्षेत्रीय तनाव और गहराने की आशंका जताई जा रही है।
फ्रांसीसी समाचार एजेंसी एएफपी के अनुसार, ईरान में पिछले कुछ दिनों से हिंसक प्रदर्शन जारी हैं। शुरुआत में ये विरोध प्रदर्शन बढ़ती महंगाई, बेरोज़गारी और जीवन यापन की लागत में इज़ाफे के खिलाफ थे, लेकिन जल्द ही यह आंदोलन 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद से सत्ता में रही धर्मतांत्रिक सरकार के खिलाफ एक व्यापक जनआंदोलन में बदल गया। कई शहरों में झड़पों, आगजनी और सुरक्षा बलों के साथ टकराव की खबरें सामने आई हैं।
सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो संदेश में इज़राइली विदेश मंत्री गिदोन सार ने कहा, “हम ईरानी जनता के स्वतंत्रता संघर्ष का समर्थन करते हैं और उनकी सफलता की कामना करते हैं। ईरानी लोग स्वतंत्रता के हकदार हैं। हमारी ईरानी जनता से कोई दुश्मनी नहीं है।” उन्होंने यह भी कहा कि इज़राइल की समस्या ईरानी जनता से नहीं, बल्कि ईरान के मौजूदा शासन से है।
सार ने ईरानी सरकार पर आतंकवाद और चरमपंथ को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह केवल इज़राइल ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए एक बड़ी चुनौती है। उनके अनुसार, ईरानी शासन लंबे समय से अस्थिरता फैलाने में भूमिका निभाता रहा है।
इस बीच, एक अलग बयान में एक वरिष्ठ इज़राइली सैन्य अधिकारी ने कहा कि इज़राइली सेना ईरान में हालात पर बारीकी से नज़र रखे हुए है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विरोध प्रदर्शन ईरान का आंतरिक मामला है, लेकिन इसके बावजूद इज़राइल का रक्षा मंत्रालय सतर्क है और अपनी रक्षात्मक तैयारियों को मजबूत कर रहा है। अधिकारी ने कहा, “अगर आवश्यकता पड़ी तो हम बलपूर्वक जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं,” जिससे संभावित सैन्य कार्रवाई के संकेत मिले हैं।
दूसरी ओर, ईरान लगातार अमेरिका और इज़राइल पर हिंसा भड़काने और इस्लामी गणराज्य की राष्ट्रीय एकता को कमजोर करने का आरोप लगाता रहा है। इससे पहले रविवार को ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बगेर ग़ालिबफ़ ने कड़ा बयान देते हुए चेतावनी दी कि अगर अमेरिका ने ईरान पर सैन्य हमला किया, तो ईरान अमेरिकी सैन्य और नौसैनिक ठिकानों के साथ-साथ इज़राइल को भी निशाना बनाएगा। उनके इस बयान ने क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा दिया है।
कुल मिलाकर, ईरान में जारी प्रदर्शनों और इज़राइल के बयानों ने पश्चिम एशिया में हालात को बेहद संवेदनशील बना दिया है, जहां किसी भी बड़े कदम से क्षेत्रीय संघर्ष के भड़कने का खतरा बढ़ सकता है।






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