हज 2026: हवाई किराए में सीमित वृद्धि पर विवाद, सरकार ने दी विस्तृत सफाई

Story by  ओनिका माहेश्वरी | Published by  onikamaheshwari | Date 01-05-2026
Hajj 2026: Controversy over Limited Hike in Airfares; Government Issues Detailed Clarification
Hajj 2026: Controversy over Limited Hike in Airfares; Government Issues Detailed Clarification

 

नई दिल्ली

हज 2026 के लिए हवाई किराए में लगभग ₹10,000 की वृद्धि को लेकर देशभर में चर्चा तेज हो गई है। विभिन्न मीडिया प्लेटफॉर्म और सामाजिक संगठनों द्वारा इस मुद्दे पर चिंता जताई जा रही है। इस बीच, अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने विस्तृत बयान जारी कर स्पष्ट किया है कि यह निर्णय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए और यात्रियों के हितों की रक्षा के लिए लिया गया है।

मंत्रालय के अनुसार, वर्तमान में मध्य-पूर्व क्षेत्र में जारी भू-राजनीतिक तनाव और संकट के कारण वैश्विक स्तर पर एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है। इसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय हवाई किरायों पर पड़ा है। इसी परिप्रेक्ष्य में एयरलाइनों ने हज यात्रियों के लिए प्रति व्यक्ति 300 से 400 अमेरिकी डॉलर तक अतिरिक्त शुल्क लगाने की मांग रखी थी।

अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने बताया कि हज समिति ने इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध करते हुए एयरलाइनों के साथ कई दौर की विस्तृत बातचीत और मोलभाव किया। मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों, हज समिति के प्रतिनिधियों और अन्य संबंधित हितधारकों के साथ लंबी चर्चा के बाद अंततः इस प्रस्तावित वृद्धि को घटाकर केवल 100 अमेरिकी डॉलर प्रति यात्री तक सीमित किया गया।

मंत्रालय का दावा है कि इस निर्णय से प्रत्येक हज यात्री को 200 से 300 अमेरिकी डॉलर तक की सीधी बचत हुई है, जो भारतीय मुद्रा में एक बड़ी राहत के रूप में देखी जा सकती है। अधिकारियों का कहना है कि यदि यह हस्तक्षेप नहीं किया जाता, तो यात्रियों पर कहीं अधिक आर्थिक बोझ पड़ता।

 

 

मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि यह वृद्धि एक ‘एकमुश्त’ और ‘विशेष परिस्थिति’ में लिया गया निर्णय है, जिसे सभी प्रस्थान केंद्रों पर समान रूप से लागू किया गया है, ताकि किसी भी प्रकार का क्षेत्रीय असंतुलन न हो। इसके अलावा, इस निर्णय को पूरी पारदर्शिता और निर्धारित कानूनी प्रक्रियाओं के तहत लागू किया गया है।

हज 2026 के लिए अब तक एक लाख से अधिक भारतीय मुसलमान पंजीकरण करा चुके हैं। मंत्रालय का कहना है कि संचालन में किसी भी प्रकार की बाधा न आए, इसके लिए समय रहते यह निर्णय लेना आवश्यक था। यदि किराए पर समय पर स्पष्टता नहीं होती, तो यात्रा प्रबंधन और लॉजिस्टिक्स पर गंभीर असर पड़ सकता था।

दिलचस्प बात यह है कि निजी हज टूर ऑपरेटरों ने पहले ही अपने पैकेज शुल्क में उल्लेखनीय वृद्धि कर दी थी। बाद में उन्होंने लगभग 150 अमेरिकी डॉलर तक की अतिरिक्त बढ़ोतरी भी लागू की, जिससे यह संकेत मिलता है कि वैश्विक परिस्थितियों का असर पूरे क्षेत्र पर समान रूप से पड़ा है।

मंत्रालय ने इस बात पर जोर दिया कि सरकार का उद्देश्य किसी भी प्रकार से यात्रियों पर अतिरिक्त बोझ डालना नहीं, बल्कि उन्हें संभावित बड़े आर्थिक दबाव से बचाना है। बयान में कहा गया है कि सरकार ने खुद पर दबाव लेकर यात्रियों के हितों की रक्षा की है।

अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने अंत में दोहराया कि वह हर भारतीय मुस्लिम के लिए हज यात्रा को अधिक सुलभ, पारदर्शी और किफायती बनाने के अपने संकल्प पर कायम है। मंत्रालय ने यह भी आश्वासन दिया कि भविष्य में भी यदि ऐसी असाधारण परिस्थितियां उत्पन्न होती हैं, तो यात्रियों के हितों को सर्वोपरि रखा जाएगा।