भारत में ओलंपिक होने पर पोलो की वापसी की उम्मीद: नवीन जिंदल

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 12-10-2026
Hopes for Polo's return if Olympics are held in India: Naveen Jindal
Hopes for Polo's return if Olympics are held in India: Naveen Jindal

 

नोएडा

जिंदल पैंथर टीम के मालिक नवीन जिंदल ने उम्मीद जताई है कि भविष्य में जब भारत ओलंपिक खेलों की मेजबानी करेगा, तब पोलो को भी ओलंपिक कार्यक्रम में शामिल किया जा सकता है। उन्होंने इस खेल के साथ भारत के ऐतिहासिक जुड़ाव का उल्लेख करते हुए कहा कि बेहतर परिवहन सुविधाओं और आधुनिक बुनियादी ढांचे की मदद से पोलो की ओलंपिक में वापसी संभव हो सकती है।

नवीन जिंदल रविवार को नोएडा स्थित जिंदल पोलो एस्टेट में जिंदल पैंथर कप के फाइनल के बाद मीडिया से बात कर रहे थे। फाइनल मुकाबले में उनकी टीम जिंदल पैंथर को विमल एरियन अचीवर्स के हाथों 6-9 से हार का सामना करना पड़ा।

जिंदल ने कहा कि पोलो आखिरी बार 1936 के बर्लिन ओलंपिक में खेला गया था। उस समय की तुलना में आज परिवहन और अन्य सुविधाओं में काफी सुधार हुआ है। अब घोड़ों को बड़े विमानों के जरिए दुनिया के किसी भी हिस्से में ले जाना संभव है। उन्होंने आशा जताई कि भारत में ओलंपिक आयोजित होने पर पोलो को भी इसमें जगह मिलेगी।

गौरतलब है कि भारत ने 2036 के ग्रीष्मकालीन ओलंपिक और पैरालंपिक खेलों की मेजबानी के लिए औपचारिक बोली प्रस्तुत की है। इसके लिए गुजरात के अहमदाबाद को प्रस्तावित मेजबान शहर के रूप में केंद्र में रखा गया है।

भारत से दुनिया में पहुंचा आधुनिक पोलो

नवीन जिंदल ने कहा कि आधुनिक पोलो की जड़ें भारत में हैं और इसे दुनिया भर में लोकप्रिय बनाने में देश की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। 1850 के दशक में पूर्वोत्तर भारत की पहाड़ियों में ब्रिटिश अधिकारियों ने इस खेल को देखा और बाद में इसे इंग्लैंड ले गए। 1870 के दशक में इंग्लैंड से यह खेल अमेरिका और अर्जेंटीना सहित कई देशों में फैल गया।

दुनिया का पहला पोलो क्लब 1859 में असम के सिलचर में स्थापित हुआ था। इसके बाद 1862 में कलकत्ता पोलो क्लब की स्थापना की गई।

दिल्ली के रेसकोर्स क्षेत्र में स्थित ऐतिहासिक जयपुर पोलो ग्राउंड का मुद्दा उठाते हुए जिंदल ने कहा कि यह मैदान पिछले लगभग 135 वर्षों से पोलो गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। जून में केंद्र सरकार के बेदखली नोटिस के खिलाफ अदालत से राहत नहीं मिलने के बाद भूमि एवं विकास कार्यालय के अधिकारियों ने इस मैदान का भौतिक कब्जा ले लिया था।

जिंदल ने उम्मीद जताई कि सरकार पोलो के लिए बेहतर सुविधाओं वाला वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराएगी। उन्होंने कहा कि पोलो दुनिया को भारत का उपहार है और इस खेल को आगे बढ़ाना देश की जिम्मेदारी है।

विमल एरियन अचीवर्स ने जीता जिंदल पैंथर कप

मैदान पर विमल एरियन अचीवर्स ने शानदार प्रदर्शन करते हुए जिंदल पैंथर को 9-6 से हराकर खिताब अपने नाम किया। विजेता टीम की ओर से 17 वर्षीय सवीर गोदारा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

मैच के पहले चक्कर में ध्रुवपाल गोदारा ने गोल करके अचीवर्स को बढ़त दिलाई। उनके बेटे सवीर ने भी गोल किया, जिससे टीम ने शुरुआती दबदबा कायम कर लिया। जिंदल पैंथर की ओर से नवीन जिंदल और गौरव सहगल ने जवाबी गोल किए, लेकिन सवीर और क्रिस जेक के योगदान से अचीवर्स ने अपनी बढ़त बनाए रखी।

बाद के चक्करों में भी विजेता टीम ने आक्रामक खेल जारी रखा। ध्रुवपाल, सिमरन सिंह शेरगिल और क्रिस ने टीम के स्कोर में योगदान दिया, जबकि गौरव सहगल ने पैंथर के लिए एक और गोल किया। हालांकि, पैंथर की टीम शुरुआती बढ़त को खत्म नहीं कर सकी।

नवीन जिंदल ने स्वीकार किया कि विपक्षी टीम ने शुरुआत में ही बढ़त बना ली थी, जिसे अंत तक तोड़ना उनकी टीम के लिए मुश्किल रहा। उन्होंने मुकाबले को अच्छा बताते हुए कहा कि दर्शकों ने भी इसका भरपूर आनंद लिया।

पोलो विश्व कप में खेल सकते हैं सवीर गोदारा

नवीन जिंदल ने सवीर गोदारा की तारीफ करते हुए कहा कि वह भारत में होने वाले आगामी पोलो विश्व कप की तैयारियों में शामिल हैं। उन्होंने संकेत दिया कि सवीर टीम का हिस्सा होंगे, हालांकि अंतिम टीम का चयन बाद में किया जाएगा।

सवीर के लिए यह फाइनल इसलिए भी खास रहा, क्योंकि उन्होंने पहली बार अपने पिता ध्रुवपाल गोदारा के साथ एक ही टीम में खेला। सवीर अपने परिवार की तीसरी पीढ़ी के पोलो खिलाड़ी हैं। उनसे पहले उनके पिता और दादा, सेवानिवृत्त कर्नल उदयपाल सिंह गोदारा, इस खेल से जुड़े रहे हैं।

सवीर ने कहा कि पिता के साथ खेलना उनके लिए अच्छा अनुभव रहा। उन्होंने कोविड महामारी के दौरान घुड़सवारी और स्टिक-बॉल अभ्यास के जरिए इस खेल को गंभीरता से सीखना शुरू किया था। उनके मुताबिक, पोलो में सबसे महत्वपूर्ण घुड़सवारी है। यदि घोड़े पर नियंत्रण और सवारी की तकनीक मजबूत हो, तो खेल के अन्य कौशल सीखना आसान हो जाता है।

सवीर ने भारत में पोलो के भविष्य को लेकर भी उम्मीद जताई। उन्होंने कहा कि देश में युवा खिलाड़ियों की नई पीढ़ी उभर रही है और यदि पोलो को ओलंपिक में जगह मिलती है, तो भारतीय खिलाड़ी अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं।

ध्रुवपाल गोदारा ने भी जीत पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि दोनों टीमों के बीच मुकाबला कड़ा था और कुछ मौकों पर किस्मत ने भी अचीवर्स का साथ दिया। बेटे के साथ खेलने के अनुभव को उन्होंने खास बताया और कहा कि नियमित अभ्यास के कारण दोनों के बीच मैदान पर अच्छा तालमेल रहा।

ध्रुवपाल ने कहा कि उनके पिता उदयपाल सिंह गोदारा और भाई मनुपाल गोदारा भी पोलो में उच्च स्तर पर खेल चुके हैं। सवीर का तीसरी पीढ़ी के खिलाड़ी के रूप में आगे बढ़ना उनके परिवार के लिए गर्व की बात है।