उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन कूनूर में टी बोर्ड के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए कोयंबटूर पहुंचे

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  onikamaheshwari | Date 21-09-2026
Vice President CP Radhakrishnan arrives in Coimbatore to attend Tea Board Event in Coonoor
Vice President CP Radhakrishnan arrives in Coimbatore to attend Tea Board Event in Coonoor

 

कोयंबटूर (तमिलनाडु) 
 
भारत के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन सोमवार को नीलगिरी जिले के कूनूर में टी बोर्ड के एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए विशेष विमान से कोयंबटूर पहुंचे। कोयंबटूर हवाई अड्डे पर तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर, मंत्री संपथ कुमार, जिला कलेक्टर पवन कुमार के साथ-साथ वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों और भाजपा नेताओं ने उनका स्वागत किया और उन्हें गुलदस्ते भेंट किए। हवाई अड्डे पर स्वागत के बाद, उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच सड़क मार्ग से कूनूर के लिए रवाना हुए। कार्यक्रम के बारे में और जानकारी का इंतजार है। इस बीच, 22 सितंबर को उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन '9वें इंडिया इंटरनेशनल वॉटर वीक 2026' का उद्घाटन करेंगे।
 
यह कार्यक्रम जल शक्ति मंत्रालय द्वारा प्रमुख केंद्रीय मंत्रालयों, राज्य सरकारों, अंतरराष्ट्रीय संगठनों, अनुसंधान और शैक्षणिक संस्थानों, उद्योग निकायों, विकास भागीदारों, नागरिक समाज और निजी क्षेत्र के भागीदारों के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है।
 
एक विज्ञप्ति के अनुसार, पांच दिवसीय यह अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम नीति निर्माताओं, वैश्विक जल क्षेत्र के नेताओं, विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं, पेशेवरों, उद्योग जगत, नागरिक समाज और युवा पेशेवरों को एक साथ लाने के लिए एक बहु-विषयक मंच प्रदान करेगा। यह मंच बातचीत, ज्ञान के आदान-प्रदान, नवाचार और साझेदारी के माध्यम से जल से जुड़ी उभरती चुनौतियों का समाधान करने और जल-सुरक्षित व जलवायु-अनुकूल भविष्य को आगे बढ़ाने में मदद करेगा।
 
विज्ञप्ति में कहा गया है कि नीदरलैंड और जर्मनी 'पार्टनर देशों' के रूप में इसमें भाग लेंगे। इनके साथ ही भारत और विदेशों से मंत्री, नीति निर्माता, वैश्विक जल क्षेत्र के नेता, अंतरराष्ट्रीय संगठन, विशेषज्ञ, शोधकर्ता, पेशेवर, उद्योग प्रतिनिधि, नागरिक समाज, स्टार्टअप, युवा और अन्य हितधारक भी शामिल होंगे, जिससे जल प्रबंधन में अंतरराष्ट्रीय सहयोग और वैश्विक अनुभव का आदान-प्रदान बढ़ेगा। चौदह राज्य 'पार्टनर राज्यों' के रूप में भाग लेंगे, जबकि छह केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों को 'पार्टनर मंत्रालयों और विभागों' के रूप में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया गया है। इससे जलवायु-अनुकूल जल प्रबंधन के लिए केंद्र-राज्य सहयोग और विभिन्न क्षेत्रों के बीच तालमेल मजबूत होगा।
 
इस कार्यक्रम में मिनिस्टीरियल प्लेनरी (मंत्रिस्तरीय सत्र), ग्लोबल वॉटर लीडर्स प्लेनरी, कंट्री फोरम, वॉटर लीडर्स फोरम, प्रैक्टिशनर्स फोरम, थीमैटिक फोरम, स्टार्टअप फोरम, यूथ फोरम, इंडस्ट्रियल फोरम और साइड इवेंट्स शामिल होंगे, जो नीति, प्रौद्योगिकी, अनुसंधान और कार्यान्वयन के क्षेत्रों में बातचीत को बढ़ावा देंगे।
 
विचार-विमर्श में समावेशी और न्यायसंगत जल प्रशासन; जल संसाधनों के इष्टतम उपयोग के लिए सहयोग; जल सुरक्षा के लिए प्रौद्योगिकी और समुदाय; जलवायु-संबंधी जोखिमों के संदर्भ में जल; जैसे विषयों को शामिल किया जाएगा। पानी के इंफ्रास्ट्रक्चर और आधुनिकीकरण के लिए नए तरह के फाइनेंसिंग मॉडल; पानी के संसाधनों का टिकाऊ प्रबंधन; और लोगों व धरती के लिए पानी।
 
22 से 25 सितंबर 2026 तक होने वाली चार दिन की इंटरनेशनल प्रदर्शनी, टिकाऊ और जलवायु-अनुकूल पानी प्रबंधन के लिए नई टेक्नोलॉजी, प्रोडक्ट्स और समाधानों को दिखाने का एक मंच प्रदान करेगी। पेयजल और स्वच्छता विभाग द्वारा 22 से 24 सितंबर तक आयोजित होने वाला दूसरा इंटरनेशनल WASH कॉन्फ्रेंस 2026, पीने के पानी की उपलब्धता, स्वच्छता इंफ्रास्ट्रक्चर, स्वच्छता व्यवहार और जन स्वास्थ्य पर केंद्रित होगा, जिसमें बड़े पैमाने पर लागू होने वाले, किफायती और टिकाऊ समाधानों पर जोर दिया जाएगा।
 
रिलीज़ में कहा गया है कि IIWW-2026 का मकसद ज्ञान और बातचीत को व्यावहारिक सुझावों, साझेदारियों और बड़े पैमाने पर लागू होने वाले समाधानों में बदलना है। इसके लिए पॉलिसी, फाइनेंसिंग, टेक्नोलॉजी और समुदाय की भागीदारी को एक साथ लाकर पानी की सुरक्षा और जलवायु-अनुकूलता को मजबूत किया जाएगा। रिलीज़ में कहा गया है कि इंडिया इंटरनेशनल वॉटर वीक, भारत और दुनिया भर के अलग-अलग स्टेकहोल्डर्स को एक साथ लाने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में उभरा है, ताकि वे अनुभव साझा कर सकें, इनोवेशन दिखा सकें और पानी के क्षेत्र में सहयोग को मजबूत कर सकें।
 
रिलीज़ के अनुसार, IIWW-2026 पानी से जुड़ी चर्चाओं में जलवायु-अनुकूलता को केंद्र में रखेगा और टिकाऊ पानी प्रबंधन के लिए बातचीत से आगे बढ़कर व्यावहारिक, सहयोगी और लागू करने योग्य समाधानों की ओर बढ़ने पर जोर देगा।