तिरुचिरापल्ली (तमिलनाडु)
शुक्रवार को तिरुचिरापल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर साल 2026 के लिए एक एंटी-हाइजैकिंग मॉक ड्रिल सफलतापूर्वक आयोजित की गई। इसका मकसद किसी विमान अपहरण की घटना होने पर अलग-अलग सुरक्षा और एविएशन एजेंसियों के बीच तैयारियों और तालमेल का जायज़ा लेना था।
इस ड्रिल के बाद एक एयरोड्रम कमेटी की मीटिंग हुई, जिसकी अध्यक्षता तिरुचिरापल्ली की पुलिस कमिश्नर N. कामिनी (IPS) ने की। इस मीटिंग में अलग-अलग सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारियों और एयरपोर्ट से जुड़े लोगों ने हिस्सा लिया और मॉक ड्रिल की समीक्षा की। यह सालाना एंटी-हाइजैकिंग मॉक ड्रिल पूरे देश के एयरपोर्ट्स पर आयोजित की जाती है, ताकि अधिकारियों को उन स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर्स (SOPs) से परिचित कराया जा सके, जिनका पालन विमान अपहरण की स्थिति में करना ज़रूरी होता है।
यह ड्रिल एयरपोर्ट की सुरक्षा और इमरजेंसी मैनेजमेंट के लिए ज़िम्मेदार अलग-अलग एजेंसियों की तैयारियों और प्रतिक्रिया क्षमताओं का भी मूल्यांकन करती है। ड्रिल के दौरान, तय प्रक्रियाओं के अनुसार कई नकली इमरजेंसी ड्रिल की गईं। AAI, तिरुचिरापल्ली एयरपोर्ट के एयरपोर्ट डायरेक्टर द्वारा जारी बयान के अनुसार, स्वतंत्र पर्यवेक्षकों ने ड्रिल पर नज़र रखी और तालमेल, प्रतिक्रिया समय और ऑपरेशनल दक्षता के संबंध में अपनी टिप्पणियाँ दर्ज कीं।
इस ड्रिल से मिले फीडबैक और टिप्पणियों को भविष्य के स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर्स में शामिल किया जाएगा, ताकि एयरपोर्ट पर सुरक्षा तैयारियों को और मज़बूत किया जा सके। इस मीटिंग का आयोजन तिरुचिरापल्ली एयरपोर्ट पर एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया के एयरपोर्ट डायरेक्टर S. S. राजू ने किया था।