आवाज द वॉयस/ नई दिल्ली
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को “व्हाइट-कॉलर आतंकवाद” जैसे खतरनाक और उभरते रुझानों पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि यह एक गंभीर चुनौती है कि आज पढ़े-लिखे और उच्च शिक्षित लोग, जिनमें डॉक्टर जैसे सम्मानित पेशों से जुड़े व्यक्ति भी शामिल हैं, आपराधिक और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में संलिप्त पाए जा रहे हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि केवल डिग्री और तकनीकी ज्ञान देना ही शिक्षा का उद्देश्य नहीं होना चाहिए, बल्कि शिक्षा प्रणाली को अच्छे संस्कार, चरित्र निर्माण और नैतिक मूल्यों का भी विकास करना चाहिए।
रक्षा मंत्री ने 10 नवंबर, 2025 को दिल्ली के लाल किले के पास हुए सुसाइड कार बम धमाके का हवाला दिया, जिसमें कम से कम 15 लोगों की मौत हो गई थी और कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। इस आतंकी हमले को सुसाइड कार बॉम्बर डॉ. उमर उन नबी ने अंजाम दिया था। इस मामले की जांच कर रही नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने इस धमाके में कथित संलिप्तता के आरोप में तीन अन्य डॉक्टरों—डॉ. मुजम्मिल शकील गनई, डॉ. अदील अहमद और डॉ. शाहीन सईद—सहित कई अन्य लोगों को गिरफ्तार किया था।
उदयपुर में भूपाल नोबेल यूनिवर्सिटी के 104वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा,
“कोई भी शिक्षा प्रणाली, जो ज्ञान के साथ-साथ विनम्रता, चरित्र और नैतिक मूल्य नहीं सिखाती, उसे सफल नहीं माना जा सकता। आज हम देख रहे हैं कि पढ़े-लिखे लोग भी आपराधिक गतिविधियों में शामिल हो रहे हैं। व्हाइट-कॉलर आतंकवाद जैसे खतरनाक ट्रेंड्स सामने आ रहे हैं, जहाँ उच्च शिक्षित लोग समाज और राष्ट्र के खिलाफ काम कर रहे हैं। दिल्ली बम धमाके किसने किए? डॉक्टरों ने। जो लोग पर्चे पर Rx लिखते हैं, वही RDX लेकर घूम रहे हैं। इसलिए यह बेहद जरूरी है कि ज्ञान के साथ-साथ अच्छे संस्कार और मजबूत चरित्र भी हों।”
रक्षा मंत्री ने आगे कहा कि शिक्षा का लक्ष्य केवल नौकरी, पद या पेशेवर सफलता तक सीमित नहीं होना चाहिए। इसके साथ-साथ शिक्षा को ऐसे नागरिक तैयार करने चाहिए जो अच्छे आचरण वाले हों, नैतिक मूल्यों में विश्वास रखते हों और समाज में सौहार्द, भाईचारे और मानवीय संवेदनाओं को बढ़ावा दें।
उन्होंने दोहराया कि यदि शिक्षा प्रणाली केवल तकनीकी दक्षता और बौद्धिक क्षमता तक सीमित रह जाती है, तो वह समाज के लिए खतरा भी बन सकती है। इसलिए शिक्षा के माध्यम से चरित्र निर्माण, सामाजिक जिम्मेदारी और राष्ट्र के प्रति कर्तव्यबोध को मजबूत करना अत्यंत आवश्यक है।
राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि विश्व इस समय चौथी औद्योगिक क्रांति के दौर से गुजर रहा है। इसके चलते तकनीकी परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और अन्य उन्नत तकनीकें न केवल हमारे जीवन को, बल्कि हमारे काम करने के तरीकों और सोचने के दृष्टिकोण को भी पूरी तरह से बदल रही हैं। ऐसे समय में शिक्षा प्रणाली की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है, ताकि तकनीक के साथ-साथ नैतिकता और मानवीय मूल्यों का संतुलन बना रहे।