नई दिल्ली
गृह मंत्रालय (MHA) ने नागरिकता (संशोधन) नियम, 2026 को अधिसूचित किया है। इसके तहत नागरिकता नियम, 2009 को अपडेट किया गया है और ओवरसीज़ सिटिज़न ऑफ़ इंडिया (OCI) सेवाओं तथा आवेदन प्रक्रियाओं से संबंधित संशोधित प्रावधान पेश किए गए हैं। मंत्रालय के अनुसार, OCI आवेदनों को अब ऑनलाइन जमा करना ज़रूरी होगा। इसमें फिजिकल OCI कार्ड और e-OCI डॉक्यूमेंटेशन, दोनों के लिए प्रावधान किए गए हैं। संशोधित फ्रेमवर्क में यह भी कहा गया है कि कोई भी नाबालिग एक ही समय में भारतीय और विदेशी, दोनों पासपोर्ट नहीं रख सकता है।
OCI कार्ड भारतीय मूल के व्यक्तियों और उनके जीवनसाथियों को मल्टीपल-एंट्री, बहुउद्देशीय आजीवन वीज़ा प्रदान करते हैं। इसके साथ ही, उन्हें कुछ आर्थिक और शैक्षिक अधिकार भी मिलते हैं। OCI कार्ड भारतीय मूल के व्यक्तियों और उनके जीवनसाथियों को मल्टीपल-एंट्री, बहुउद्देशीय आजीवन वीज़ा देना जारी रखते हैं। इसके साथ ही, उन्हें भारत में कुछ आर्थिक और शैक्षिक लाभ भी मिलते हैं। हालाँकि, सरकार ने यह दोहराया है कि OCI का दर्जा होने से वोट देने या संवैधानिक पदों पर बैठने जैसे राजनीतिक अधिकार नहीं मिलते हैं।
सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि OCI का दर्जा एक विशेषाधिकार है, कोई अधिकार नहीं। यदि OCI कार्डधारक भारतीय कानूनों का उल्लंघन करते हुए पाया जाता है, तो उसका यह दर्जा वापस लिया जा सकता है। ओवरसीज़ सिटिज़न ऑफ़ इंडिया (OCI) योजना मूल रूप से वर्ष 2005 में नागरिकता अधिनियम, 1955 में किए गए एक संशोधन के माध्यम से शुरू की गई थी। यह योजना भारतीय मूल के व्यक्तियों को 'ओवरसीज़ सिटिज़न ऑफ़ इंडिया' के रूप में पंजीकृत करने की अनुमति देती है। इसके लिए शर्त यह है कि वे 26 जनवरी, 1950 को या उसके बाद भारत के नागरिक रहे हों, अथवा उस तारीख को नागरिक बनने के पात्र रहे हों। हालाँकि, ऐसे व्यक्ति जो वर्तमान में पाकिस्तान या बांग्लादेश के नागरिक हैं (या रहे हैं), अथवा जिनके माता-पिता, दादा-दादी या परदादा-परदादी पाकिस्तान या बांग्लादेश के नागरिक रहे हैं, वे इस योजना के तहत पात्र नहीं हैं।
हाल के वर्षों में, गृह मंत्रालय (MHA) ने OCI पंजीकरण से संबंधित नियमों को और भी सख्त किया है। पिछले वर्ष 11 अगस्त को, मंत्रालय ने एक अधिसूचना जारी की थी। इसमें कहा गया था कि यदि किसी व्यक्ति को दो वर्ष या उससे अधिक की कारावास की सज़ा सुनाई जाती है, अथवा उसके विरुद्ध ऐसे किसी अपराध के लिए आरोप-पत्र (charge-sheet) दायर किया जाता है जिसके लिए सात वर्ष या उससे अधिक की कारावास की सज़ा का प्रावधान है, तो उसका OCI पंजीकरण रद्द किया जा सकता है। यह नोटिफिकेशन नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 7D के क्लॉज़ (da) के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए जारी किया गया था।
नोटिफिकेशन में कहा गया है, "नागरिकता अधिनियम, 1955 (1955 का 57) की धारा 7D के क्लॉज़ (da) द्वारा मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए, केंद्र सरकार यह घोषणा करती है कि किसी ओवरसीज़ सिटिज़न ऑफ़ इंडिया (OCI) का रजिस्ट्रेशन तब रद्द किया जा सकता है, जब किसी व्यक्ति को कम से कम दो साल की जेल की सज़ा सुनाई गई हो, या उस पर ऐसे अपराध के लिए चार्जशीट दायर की गई हो जिसमें सात साल या उससे ज़्यादा की जेल की सज़ा हो सकती हो।" इन नए नियमों का मकसद OCI आवेदन प्रक्रियाओं को आसान बनाना है, साथ ही नागरिकता से जुड़े नियमों के तहत अनुपालन और सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों को मज़बूत करना है।