आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
अमेरिका और भारत के बीच शनिवार को अंतरिम व्यापार समझौते के लिए एक रूपरेखा को अंतिम रूप देने की घोषणा के बाद केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारत सरकार इलेक्ट्रॉनिक्स और बौद्धिक संपदा (आईपी) से संबंधित मामलों पर अमेरिका के साथ घनिष्ठ रूप से जुड़ी हुई है।
भारत-अमेरिका संयुक्त बयान में द्विपक्षीय व्यापार को प्रभावित करने वाली गैर-शुल्क बाधाओं को दूर करने का आह्वान किया गया है।
इसमें विशेष रूप से अमेरिकी चिकित्सा उपकरणों और सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) वस्तुओं के व्यापार से जुड़ी बाधाओं का उल्लेख है।
बयान के प्रभाव और इसके अपेक्षित असर के बारे में पूछे जाने पर वैष्णव ने कहा कि वाणिज्य मंत्रालय इस पर विवरण साझा करने वाला नोडल निकाय है, लेकिन जहां तक इलेक्ट्रॉनिक्स का सवाल है, भारत चर्चा में गहराई से शामिल है।
मंत्री ने कहा, "हम इलेक्ट्रॉनिक्स और आईपी के मोर्चे पर अपनी ओर से बहुत करीब से जुड़े हुए हैं। हम सह-विकास और सह-निर्माण में विश्वास करते हैं। हम आईपी का सम्मान करने में विश्वास करते हैं। हमारा मानना है कि नए उत्पादों, नए विचारों और नयी प्रौद्योगिकियों के मामले में भारत के पास पूरी दुनिया को देने के लिए बहुत कुछ है और यह यात्रा बहुत तेज गति से आगे बढ़ रही है।"
संयुक्त बयान में इस बात पर जोर दिया गया है कि समझौते के लागू होने के छह महीने के भीतर इस बात पर सकारात्मक परिणाम के लिए काम किया जाएगा कि क्या अमेरिकी मानकों या अंतरराष्ट्रीय मानकों (परीक्षण आवश्यकताओं सहित) को भारतीय बाजार में अमेरिकी निर्यात के उद्देश्यों के लिए स्वीकार किया जा सकता है।
बयान के अनुसार, भारत और अमेरिका ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट (जीपीयू) और डेटा सेंटर में उपयोग होने वाली अन्य वस्तुओं सहित प्रौद्योगिकी उत्पादों के व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि करेंगे और प्रौद्योगिकी सहयोग का विस्तार करेंगे।