दुबई
भारत का केंद्रीय बजट 2026–27 ऐसे समय पेश किया जा रहा है, जब वैश्विक आर्थिक अस्थिरता बरकरार है और भारत की विकास कहानी मजबूत बनी हुई है। UAE में रहने वाले भारतीय और NRIs के लिए यह बजट खास मायने रखता है, क्योंकि यह कर, निवेश प्रवाह, रोजगार और दीर्घकालिक आर्थिक दिशा को प्रभावित करेगा।
नीतिगत संकेतकों और विशेषज्ञों की राय के अनुसार, बजट 2026 में राजकोषीय अनुशासन, निवेश में बढ़ोतरी, कर निश्चितता, रोजगार सृजन और नई तकनीकी/उद्योगों के लिए समर्थन प्रमुख होंगे।
राजकोषीय अनुशासन
अर्थशास्त्री महेन्द्र देव ने कहा कि बजट “विकसित भारत” रोडमैप के तहत तैयार किया जाएगा, जिसमें राजकोषीय घाटा और कर्ज-से-GDP अनुपात पर विशेष ध्यान रहेगा। कोविड-19 के दौरान 9% तक था राजकोषीय घाटा, जो इस साल लगभग 4.8% पर आ गया है। सरकार लक्ष्यित कर रही है कि इसे आगे चलकर 4.4% तक घटाया जाए।
निवेश में बढ़ोतरी
7–8% विकास दर हासिल करने के लिए लगभग 35% निवेश दर जरूरी है। महेन्द्र देव ने कहा कि सार्वजनिक और निजी दोनों निवेश में वृद्धि आवश्यक है और पूंजी का उपयोग अधिक कुशलतापूर्वक होना चाहिए। इसके अलावा तकनीकी नवाचार और उत्पादकता पर ध्यान दिया जाएगा, जिससे दीर्घकालिक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़े।
वैश्विक जोखिम और आत्मनिर्भरता
जियो-पॉलिटिकल तनाव और टैरिफ अस्थिरता वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए जोखिम हैं। इन परिस्थितियों में भारत आत्मनिर्भरता पर जोर देगा और गुणवत्ता मानकों के साथ वैश्विक स्तर की विनिर्माण क्षमता विकसित करेगा।
बजट में व्यवसायों की उम्मीदें
EY India ने सुझाव दिया कि PLI योजना को AI, स्पेस, रोबोटिक्स जैसे नए तकनीकी क्षेत्रों में विस्तारित किया जा सकता है। KPMG India ने कर्मचारियों के लिए मानक कटौती बढ़ाने और हाउसिंग लोन ब्याज की छूट की सिफारिश की।
रोजगार और स्टार्टअप्स
पूर्व Infosys बोर्ड सदस्य TV मोहनदास पाई ने कहा कि बजट का केंद्र रोजगार, कौशल विकास और 350 विशेष रोजगार जिलों का निर्माण होना चाहिए। स्टार्टअप्स और नवाचार के लिए अधिक निवेश की जरूरत है, खासकर AI और डीप टेक्नोलॉजी में।
UAE NRIs के लिए असर
बजट 2026 का प्रभाव क्रॉस-बॉर्डर टैक्स योजना, रियल एस्टेट निवेश, विनिर्माण और स्टार्टअप फंडिंग पर पड़ेगा। आधिकारिक घोषणाएँ 1 फरवरी को पेश की जाएंगी।इस बजट के माध्यम से सरकार राजकोषीय अनुशासन, सार्वजनिक निवेश, कर निश्चितता, उद्योग-विशेष प्रोत्साहन, रोजगार और नवाचार को प्राथमिकता देगी। UAE में रहने वाले भारतीयों के लिए यह कर, निवेश और दीर्घकालिक पोर्टफोलियो रणनीति को प्रभावित करने वाला होगा।