आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
भारत ने सोमवार को संयुक्त राष्ट्र में बहुपक्षवाद पर आयोजित पहले शिखर सम्मेलन की सह-मेजबानी की और कहा कि यह पहल ऐसे समय में हुई है जब ‘‘वैश्विक व्यवस्था दबाव में है।’’
भारत ने जोर दिया कि अधिक भागीदारी वाली विचार-विमर्श की प्रक्रिया तथा पारदर्शी निर्णय लेने की व्यवस्था अब बेहद जरूरी है।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के उच्च स्तरीय 81वें सत्र के इतर आयोजित पहले ‘पार्टनर्स फॉर मल्टीलेटरलिज्म, इंटरनेशनल लॉ, पीस एंड प्रॉस्पेरिटी’ (बहुपक्षवाद, अंतरराष्ट्रीय कानून, शांति और समृद्धि के लिए साझेदार) यानी पी4एम शिखर सम्मेलन की सह-अध्यक्षता की। उनके साथ ऑस्ट्रेलिया, बारबाडोस, ब्राजील, कनाडा और केन्या के नेताओं ने भी सम्मेलन की सह-मेजबानी की।
संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित सम्मेलन में जयशंकर ने कहा, ‘‘भारत को सह-प्रायोजक के रूप में शामिल होकर खुशी है। हम ऐसे समय में मुलाकात कर रहे हैं जब वैश्विक व्यवस्था दबाव में है।’’
उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दशकों में दुनिया ने शक्ति संतुलन में लगातार बदलाव देखा है, जो लंबे समय से अपेक्षित संरचनात्मक परिवर्तन था।