Improvement in overseas markets, increase in winter demand strengthened all oil and oilseeds prices last week.
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
विदेशों में बाजार मजबूत रहने, रुपये के दाम में आई गिरावट तथा जाड़े के अलावा शादी-विवाह के मौसम की मांग बढ़ने से बीते सप्ताह देश के तेल-तिलहन बाजारों में सभी तेल-तिलहनों के दाम मजबूत रहे।
इस साप्ताहिक दाम में मजबूती के बावजूद सूरजमुखी, मूंगफली जैसे तिलहन के दाम न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से नीचे ही बने हुए हैं। महाराष्ट्र में मांग बढ़ने और कम दाम पर किसानों की ओर से बिकवाली घटाने की स्थिति को देखते हुए सोयाबीन प्लांट वालों ने सोयाबीन तिलहन का दाम 100 रुपये क्विंटल बढ़ाया है। सोयाबीन का दाम कुछ समय पूर्व एमएसपी से काफी नीचे हुआ करता था लेकिन मांग बढ़ने के बीच प्लांट वालों द्वारा खरीद का दाम बढ़ाये जाने के कारण अब इसका हाजिर भाव लगभग 5,300 रुपये क्विंटल हो गया है जबकि सोयाबीन का एमएसपी 5,328 रुपये क्विंटल है।
उन्होंने कहा कि इसके अलावा बीते सप्ताह डॉलर के मुकाबले रुपये का मूल्य घटने से आयातित तेलों की लागत बढ़ गई है और यह भी खाद्यतेल-तिलहनों में मजबूती आने का एक कारण है।
पिछले हफ्ते सरकार ने आयातित खाद्यतेलों के आयात शुल्क मूल्य में भी बदलाव किये हैं। इस बदलाव के तहत कच्चा पामतेल (सीपीओ) का आयात शुल्क मूल्य 41 रुपये क्विंटल और सोयाबीन डीगम का आयात शुल्क मूल्य 24 रुपये क्विंटल बढ़ाया गया है।
सूत्रों ने कहा कि इस बार सरसों की पैदावार अच्छी है। विदेशों में मजबूती और जाड़े की मांग बढ़ने से अन्य तेल-तिलहनों की तरह सरसों में भी सुधार आया। हालांकि, ऊंचा दाम होने तथा आगामी खड़ी फसल को देखते हुए इसका उठाव कम है। तेल मिलें और खुदरा कारोबारी सरसों में संभल-संभल के कारोबार कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सोयाबीन की मांग ज्यादा है जबकि इसका आयात घटा है। विदेशों में भी दाम सुधरा है और रुपया भी कमजोर हुआ है। इन परिस्थितियों में बीते सप्ताह सोयाबीन तेल-तिलहन भी मजबूती के साथ बंद हुए।
सूत्रों ने कहा कि वैसे तो जाड़े में साबुत खाने वालों की मांग तथा अच्छी गुणवत्ता के तेल की भी मांग बढ़ने से बीते सप्ताह मूंगफली तेल-तिलहन के दाम में सुधार आया। लेकिन इसके दाम अभी भी एमएसपी से नीचे बने हुए हैं।
उन्होंने कहा कि भाव ऊंचा बोले जाने से बीते सप्ताह पाम-पामोलीन तेल के दाम भी अधिक रहे पर सर्दियों में इसका उठाव कमजोर बना हुआ है।
सूत्रों ने कहा कि जाड़े में नमकीन बनाने वाली कंपनियों की ओर से हल्के तेलों में गंधहीन बिनौला तेल की अधिक मांग रहती है जिससे बिनौला तेल के दाम में भी बीते सप्ताह सुधार देखने को मिला।