IIIT Hyderabad launches Advanced EEG Lab to advance cognitive neuroscience research
हैदराबाद (तेलंगाना)
इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी हैदराबाद (IIIT हैदराबाद) ने 'ब्रेनलैब' (BrainLab) लॉन्च किया है। यह इंसानी दिमाग कैसे जानकारी, ध्यान, धारणा और व्यवहार को प्रोसेस करता है, इस पर एडवांस्ड रिसर्च करने के लिए एक ह्यूमन इलेक्ट्रोएन्सेफलोग्राफी (EEG) रिसर्च सुविधा है। यह नई सुविधा भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के 'फंड फॉर इम्प्रूवमेंट ऑफ़ S&T इंफ्रास्ट्रक्चर' (DST-FIST) प्रोग्राम के तहत बनाई गई है।
कॉग्निटिव साइंस लैब (CSL) को 2024 में 'लाइफ साइंसेज FIST' (FIST-LS) प्रोग्राम के तहत ग्रांट मिली। ग्रांट पाने वाली टीम में प्रो. बापी राजू, डॉ. विष्णु श्रीकुमार, डॉ. भक्ति डोंगओनकर, डॉ. विनू अल्लूरी, डॉ. प्रियंका श्रीवास्तव और डॉ. कविता वेमुरी शामिल थे। इस सुविधा में 128-चैनल वाला हाई-डेंसिटी EEG सिस्टम, 32-चैनल वाला मोबाइल EEG सिस्टम और इलेक्ट्रोड की सटीक स्थिति को ट्रैक करने के लिए एक डिजिटाइज़र लगा है। EEG सेटअप के साथ एक एडवांस्ड रिसर्च-ग्रेड आई-ट्रैकिंग सिस्टम भी जोड़ा गया है, जिससे रिसर्चर दिमाग की गतिविधि को नज़र के पैटर्न और ध्यान के पुतली-आधारित माप के साथ सिंक कर सकते हैं। कम्पैटिबल सेंसर का इस्तेमाल करके गैल्वेनिक स्किन रिस्पॉन्स (GSR) जैसे अतिरिक्त शारीरिक माप भी रिकॉर्ड किए जा सकते हैं।
इस नए इंफ्रास्ट्रक्चर से IIIT हैदराबाद के रिसर्चर भारतीय आबादी के लोगों के साथ कंट्रोल्ड कॉग्निटिव न्यूरोसाइंस एक्सपेरिमेंट कर सकेंगे और मुख्य रूप से कहीं और इकट्ठा किए गए डेटासेट पर निर्भर रहने के बजाय ओरिजिनल डेटासेट तैयार कर सकेंगे। उम्मीद है कि इससे कॉग्निटिव साइंस, न्यूरोसाइंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, भाषा, धारणा, ध्यान, सीखने और ह्यूमन-कंप्यूटर इंटरैक्शन से जुड़ी रिसर्च को बढ़ावा मिलेगा।
इस सुविधा के फैकल्टी इंचार्ज डॉ. विष्णु श्रीकुमार ने कहा, "यह सुविधा IIIT हैदराबाद में एक्सपेरिमेंटल कॉग्निटिव साइंस को विकसित करने की दिशा में एक अहम कदम है। यह हमारे रिसर्चर को नए सवाल पूछने और अपनी आबादी से हाई-क्वालिटी डेटा तैयार करने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर देती है, साथ ही कॉग्निटिव साइंस, न्यूरोसाइंस और टेक्नोलॉजी के बीच इंटरडिसिप्लिनरी रिसर्च के मौके भी बनाती है।" EEG लैब एक साझा रिसर्च सुविधा के तौर पर काम करेगी और IIIT हैदराबाद के फैकल्टी और छात्रों के साथ-साथ स्टार्टअप, इंडस्ट्री और बाहरी रिसर्च ग्रुप्स के लिए भी उपलब्ध होगी, बशर्ते वे इस्तेमाल का शुल्क (consumables और मेंटेनेंस के लिए) दें। इस्तेमाल करने की प्रक्रिया की जानकारी जल्द ही इंस्टीट्यूट की वेबसाइट पर उपलब्ध होगी।
इस नई सुविधा के ट्रेनिंग और क्षमता निर्माण का एक प्लेटफॉर्म बनने की भी उम्मीद है। इस इंफ्रास्ट्रक्चर के आधार पर कोर्स, वर्कशॉप और समर स्कूल की योजना बनाई जा रही है; पहली वर्कशॉप 10-11 दिसंबर, 2026 को 'कॉग्निटिव साइंस की सालाना कॉन्फ्रेंस (ACCS) 2026' की प्री-कॉन्फ्रेंस गतिविधियों के हिस्से के तौर पर आयोजित की जाएगी। EEG लैब, IIIT हैदराबाद में एक्सपेरिमेंटल कॉग्निटिव साइंस इंफ्रास्ट्रक्चर के बड़े विस्तार की दिशा में पहला कदम है।
भविष्य की योजनाओं में न्यूरोमॉड्यूलेशन और नींद से जुड़ी रिसर्च के लिए सुविधाएं शामिल हैं, और यह सेंटर फंडामेंटल और एप्लाइड कॉग्निटिव साइंस, दोनों के लिए एक बड़ा हब बनाने की दिशा में काम कर रहा है। IIITH की कॉग्निटिव साइंस लैब के हेड, प्रो. बापी राजू ने कहा, "खास बात यह है कि यह ग्रांट DST के 'लाइफ साइंसेज FIST (FIST-LS)' प्रोग्राम के तहत दी गई है, जो आम तौर पर मुख्य लाइफ साइंसेज रिसर्च को सपोर्ट करता है। सेंटर की जानकारी के मुताबिक, कॉग्निटिव साइंस प्रपोज़ल के लिए यह पहला FIST-LS अवॉर्ड है, जो इस क्षेत्र के इंटरडिसिप्लिनरी (कई विषयों से जुड़े) दायरे को एक अहम पहचान दिलाता है।"