अनुदानित परास्नातक शिक्षा के बाद डॉक्टर अनिवार्य सरकारी सेवा बॉन्ड से बच नहीं सकते : उच्च न्यायालय

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 22-09-2026
Doctors cannot escape mandatory government service bond after subsidized post-graduation: High Court
Doctors cannot escape mandatory government service bond after subsidized post-graduation: High Court

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली

 
 इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने कहा है कि सरकारी संस्थानों में अनुदानित दरों पर मेडिकल परास्नातक की शिक्षा ग्रहण करने वाले डॉक्टर अपने दाखिले के साथ जुड़े अनिवार्य सरकारी सेवा बॉन्ड से बच नहीं सकते।
 
न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति अवधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने सोमवार को कहा कि दो साल की अनिवार्य सरकारी सेवा की शर्त का उद्देश्य सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित करना और मरीजों के जीवन के अधिकार की रक्षा करना है।
 
खंडपीठ ने कहा कि तैनाती देने में सिर्फ प्रशासनिक विलम्ब होने से बॉन्ड के प्रति आबद्धता खत्म नहीं हो जाती।
 
पीठ ने यह आदेश लखनऊ के संजय गांधी परास्नातक आयुर्वेद विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) से ‘ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन’ में ‘एमडी’ (परास्नातक) का पाठ्यक्रम पूरा करने वाली डॉक्टर अपरूपा सेन गुप्ता की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।
 
सेन गुप्ता की दलील थी कि चूंकि सरकार ने उनका पाठ्यक्रम पूरा होने के तीन महीने के भीतर उन्हें तैनाती नहीं दी इसलिए उनके दो साल के अनिवार्य सेवा बॉन्ड को समाप्त माना जाना चाहिए।