Delhi court grants bail to eight accused in Rs 9.90-crore gold smuggling case; defence flags disputed statements
नई दिल्ली
दिल्ली की एक अदालत ने कस्टम्स के एक मामले में आठ आरोपियों को ज़मानत दे दी है। यह मामला 6.495 किलोग्राम वज़न और लगभग 9.90 करोड़ रुपये की कीमत वाली 23 सोने की चेन की कथित तस्करी से जुड़ा है। अदालत ने पाया कि किसी भी आरोपी के पास से कोई चीज़ बरामद नहीं हुई थी और इस चरण में ऐसा कोई स्वतंत्र सबूत नहीं है जो उन्हें बरामद सोने से सीधे तौर पर जोड़ता हो। चीफ़ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट मृदुल गुप्ता ने 5 अक्टूबर को BNSS की धारा 480 के तहत दायर आठ ज़मानत याचिकाओं पर यह आदेश पारित किया। वकील प्रदीप राणा दो याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए, जबकि अन्य वकीलों ने बाकी आरोपियों का प्रतिनिधित्व किया।
राणा और बचाव पक्ष के वकीलों ने कहा कि याचिकाकर्ताओं को उनकी औपचारिक गिरफ्तारी से पहले ही गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में रखा गया था और उनके साथ हिरासत में हिंसा और अमानवीय व्यवहार किया गया था। उन्होंने मेडिकल जांच रिपोर्ट में दिख रही चोटों, सूजन और घावों का हवाला दिया और तर्क दिया कि कस्टम्स एक्ट की धारा 108 के तहत दर्ज किए गए कथित बयान स्वेच्छा से नहीं दिए गए थे। बचाव पक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि आरोपियों से पहले से लिखे हुए कुछ दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर करवाए गए थे।
बचाव पक्ष ने आगे तर्क दिया कि कस्टम्स का मामला मुख्य रूप से दुबई में हुई एक कथित व्यवस्था के बारे में अटकलों और अनुमानों पर आधारित था, जिसके तहत सुरक्षा क्षेत्र से पहले आरोपियों के बीच सोने की चेन बांटी गई थीं और बाद में वापस ले ली गई थीं।
याचिकाकर्ताओं ने बरामद सोने से किसी भी तरह के संबंध से इनकार किया और कहा कि उनकी दुबई यात्रा जायज़ मकसद से थी। उन्होंने यह भी बताया कि किसी भी आरोपी के शरीर, सामान या कब्ज़े से, या उनके कहने पर सोने की कोई बरामदगी नहीं हुई थी।
बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि एक याचिकाकर्ता के घर पर की गई तलाशी में सोने से जुड़ी कोई भी आपत्तिजनक चीज़ बरामद नहीं हुई, जो कस्टम्स की कार्यवाही का मुख्य विषय था। कथित प्रतिबंधित सामान पहले ही ज़ब्त किया जा चुका था, और आरोपियों के पासपोर्ट और मोबाइल फोन भी विभाग की कस्टडी में थे, जबकि यात्री, इमिग्रेशन, उड़ान और CCTV रिकॉर्ड जांचकर्ताओं के पास उपलब्ध आधिकारिक रिकॉर्ड थे। इसलिए, बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि सबूतों के साथ छेड़छाड़ की कोई वास्तविक संभावना नहीं थी। कस्टम्स डिपार्टमेंट ने ज़मानत की अर्ज़ियों का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी 21 सितंबर को दुबई से IGI एयरपोर्ट पहुंचे थे और ग्रीन चैनल पार करने के बाद उन्हें रोका गया। डिपार्टमेंट के अनुसार, विमान से तीन पाउच बरामद किए गए जिनमें 6,495 ग्राम वज़न की 23 सोने की चेन थीं, जिनकी कीमत लगभग 9.90 करोड़ रुपये थी। आरोप है कि दुबई में सिक्योरिटी से पहले सोना आरोपियों के बीच बांटा गया था और बाद में वापस इकट्ठा कर लिया गया।
डिपार्टमेंट ने कस्टम्स एक्ट की धारा 108 के तहत दर्ज बयानों का भी हवाला दिया और दावा किया कि आरोपियों ने सोने की तस्करी में शामिल होने की बात स्वीकार की है और अतीत में भी इसी तरह के तरीके (modus operandi) का इस्तेमाल करने की बात बताई है। हालांकि, कोर्ट ने गौर किया कि आरोपियों ने इन बयानों की स्वैच्छिकता और सबूत के तौर पर इनकी अहमियत पर खास तौर पर सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने कहा कि सबूत के तौर पर इनकी असल अहमियत क्या है और क्या ये बयान कथित साज़िश और बरामद सोने के साथ हर अर्ज़ीकर्ता के व्यक्तिगत संबंध को साबित करने के लिए काफ़ी हैं, इस पर सही समय पर सबूतों की जांच-परख की ज़रूरत होगी।
कोर्ट ने यह भी गौर किया कि धारा 108 के तहत विवादित बयानों और आरोपियों के एक साथ यात्रा करने की परिस्थितियों के अलावा, दुबई में सोना सौंपने और बाद में उसे इकट्ठा करने की कथित घटना की पुष्टि करने के लिए कोई स्वतंत्र और समकालीन सबूत पेश नहीं किया गया। इसमें इस चरण पर ऐसे सबूतों का अभाव शामिल है, जैसे कि संबंधित बातचीत, CCTV फुटेज या एयरलाइन/ग्राउंड-हैंडलिंग कर्मचारियों के बयान, जो खास तौर पर इस कथित लेन-देन को साबित करते हों। कोर्ट ने आगे कहा कि मुख्य भौतिक सबूत, यानी कथित तस्करी का सामान, पहले ही ज़ब्त किया जा चुका है, जबकि आरोपियों के मोबाइल फ़ोन और पासपोर्ट तथा संबंधित यात्री, इमिग्रेशन और फ़्लाइट रिकॉर्ड जांच एजेंसी के नियंत्रण में हैं।
अभियोजन पक्ष की इस आशंका पर कि आरोपी गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं, कोर्ट ने कहा कि ऐसी चिंताओं को ज़मानत की उचित शर्तों के ज़रिए दूर किया जा सकता है, जिसमें सह-आरोपियों या गवाहों को धमकाने, प्रभावित करने या उकसाने पर रोक लगाना शामिल है। एक आरोपी के घर से चार किलोग्राम चांदी की छड़ें और 7 लाख रुपये नकद बरामद होने के संबंध में, कोर्ट ने गौर किया कि कथित तस्करी का सोना उस जगह से बरामद नहीं हुआ था और अभी तक ऐसा कोई सबूत नहीं दिखाया गया है जो चांदी या नकद को कथित तस्करी के सोने से जोड़ता हो। कोर्ट ने ध्यान दिया कि सभी आरोपी 23 सितंबर से न्यायिक हिरासत में हैं और उनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। कोर्ट को ऐसा कोई ठोस सबूत भी नहीं मिला जिससे लगे कि वे भाग सकते हैं या उन्होंने पहले जांच में बाधा डालने की कोशिश की है। कोर्ट ने कहा, "ज़मानत नियम है और जेल अपवाद है।" साथ ही, कोर्ट ने यह भी कहा कि ज़मानत का मकसद आरोपी की मौजूदगी सुनिश्चित करना है।