आर्कटिक में रूस, चीन का मुकाबला करने के लिए नाटो के साथ बातचीत कर रहा ब्रिटेन

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 12-01-2026
Britain in talks with NATO to counter Russia, China in Arctic
Britain in talks with NATO to counter Russia, China in Arctic

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली

 
 ब्रिटेन उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) में अपने सहयोगियों के साथ इस बात पर चर्चा कर रहा है कि रूस और चीन से उत्पन्न खतरों का मुकाबला करने के लिए आर्कटिक क्षेत्र में सुरक्षा को कैसे मजबूत किया जा सकता है। सरकार के एक मंत्री ने रविवार को यह जानकारी दी।
 
ब्रिटेन की परिवहन मंत्री हाइडी एलेक्जेंडर ने कहा कि ये वार्ताएं ‘‘सामान्य प्रक्रिया’’ का हिस्सा हैं और हाल में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड को अपने नियंत्रण में लेने की धमकियों के जवाब में नहीं की जा रहीं।
 
ट्रंप ने शुक्रवार को कहा था कि वह नाटो के सहयोगी डेनमार्क के अर्ध-स्वायत्त क्षेत्र ग्रीनलैंड को हासिल करने के लिए एक समझौता करना चाहते हैं, ताकि रूस या चीन उसे अपने नियंत्रण में न ले सकें।
 
ट्रंप ने कहा था, ‘‘हम ग्रीनलैंड को लेकर कुछ करने जा रहे हैं, चाहे वे इसे पसंद करें या नहीं।”
 
लगभग 57,000 की आबादी वाला ग्रीनलैंड डेनमार्क द्वारा संरक्षित है, जिसकी सैन्य क्षमता अमेरिका की तुलना में बहुत कम है। अमेरिका का वहां एक सैन्य अड्डा भी है। डेनमार्क की प्रधानमंत्री ने चेतावनी दी है कि ग्रीनलैंड पर कब्जा नाटो के लिए खतरा होगा।
 
ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप प्रशासन द्वारा चेतावनियां दोहराए जाने के बाद अमेरिका और डेनमार्क के बीच तनाव बढ़ गया है। अमेरिका में डेनमार्क के राजदूत जेस्पर मोलर सोरेनसन ने ग्रीनलैंड में नवनियुक्त अमेरिकी दूत जेफ लैंड्री के इस बयान पर पलटवार किया कि ‘‘द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अमेरिका ने ग्रीनलैंड की संप्रभुता की रक्षा की थी, जब डेनमार्क ऐसा नहीं कर सका था।’’
 
सोरेनसन ने जवाब में कहा कि डेनमार्क हमेशा अमेरिका के साथ खड़ा रहा है, खासकर 11 सितंबर 2001 के हमलों के बाद और यह तय करने का अधिकार केवल ग्रीनलैंड के लोगों को है कि उनका भविष्य क्या होगा।