अश्विनी वैष्णव वाशिंगटन पहुंचे, महत्वपूर्ण खनिज संबंधी मंत्रिस्तरीय बैठक में भाग लेंगे

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 12-01-2026
Ashwini Vaishnaw arrives in Washington, will participate in a ministerial meeting on critical minerals.
Ashwini Vaishnaw arrives in Washington, will participate in a ministerial meeting on critical minerals.

 

न्यूयॉर्क/वाशिंगटन

भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव रविवार को वाशिंगटन डीसी पहुंच गए, जहां वह अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट की अध्यक्षता में आयोजित महत्वपूर्ण खनिज संबंधी मंत्रिस्तरीय बैठक में हिस्सा लेंगे। यह बैठक जी-7 देशों के वित्त मंत्रियों के बीच खनिज आपूर्ति, सुरक्षा और रणनीति पर विचार-विमर्श करने के लिए आयोजित की जा रही है।

जी-7 देशों में अमेरिका, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान और ब्रिटेन शामिल हैं, इसके साथ ही यूरोपीय संघ भी इस समूह का हिस्सा है। इसके अलावा, भारत, ऑस्ट्रेलिया और अन्य कई प्रमुख देशों को भी बैठक में आमंत्रित किया गया है। यह बैठक वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण और दुर्लभ खनिजों की स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करने के प्रयासों का हिस्सा है।

अश्विनी वैष्णव, जो सूचना और प्रसारण मंत्रालय का कार्यभार भी संभाल रहे हैं, ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि उन्होंने वाशिंगटन डीसी पहुंचकर कल होने वाली मंत्रिस्तरीय बैठक में भाग लेने की तैयारी पूरी कर ली है। उन्होंने कहा, “‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सुरक्षित और भरोसेमंद महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति श्रृंखलाएं अत्यंत आवश्यक हैं। यह बैठक वैश्विक सहयोग और रणनीति तय करने में मदद करेगी।”

अमेरिकी प्रशासन के अनुसार, खनिज आपूर्ति की सुरक्षा उनकी राष्ट्रीय और आर्थिक सुरक्षा के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि चीन का वैश्विक खनिज उत्पादन पर अत्यधिक प्रभुत्व अमेरिका और अन्य देशों के लिए जोखिम पैदा करता है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के आंकड़ों के अनुसार, चीन तांबा, लिथियम, निकल, कोबाल्ट, ग्रेफाइट और कई दुर्लभ खनिजों का प्रमुख शोधक और रिफाइनर है, और इसका वैश्विक बाजार में लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा है।

बैठक में इस बात पर चर्चा होगी कि कैसे प्रमुख देशों के बीच सहयोग बढ़ाकर खनिज आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुरक्षित किया जा सके और अत्यधिक निर्भरता को कम किया जा सके। भारत के लिए यह बैठक इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि देश तेजी से डिजिटल और हरित ऊर्जा क्षेत्रों में निवेश कर रहा है और इसके लिए स्थिर खनिज आपूर्ति बेहद जरूरी है।

अश्विनी वैष्णव के अनुसार, यह बैठक भारत और अन्य देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने का अवसर भी साबित होगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि वैश्विक सहयोग से खनिजों की सुरक्षित आपूर्ति सुनिश्चित होगी, जो तकनीकी विकास और ऊर्जा सुरक्षा दोनों के लिए लाभदायक होगा।

इस तरह, वाशिंगटन में होने वाली यह बैठक न केवल खनिज सुरक्षा बल्कि वैश्विक आर्थिक और तकनीकी स्थिरता के दृष्टिकोण से भी अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।