आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की झारखंड इकाई ने उच्च शिक्षण संस्थानों में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (उच्च शिक्षा संस्थानों में समता के संवर्द्धन हेतु) विनियम, 2026 के क्रियान्वयन की मांग को लेकर शनिवार को यहां प्रदर्शन किया।
वाम दल समर्थित आइसा के सदस्यों ने रांची के बिरसा चौक पर प्रदर्शन किया, जिसमें जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष धनंजय भी शामिल हुए।
धनंजय ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि जातिगत भेदभाव को रोकने के लिए इंजीनियरिंग और मेडिकल संस्थानों सहित सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में यूजीसी के विनियमों को लागू किया जाना चाहिए।
यूजीसी द्वारा 13 जनवरी को अधिसूचित उच्च शिक्षण संस्थानों में समता को बढ़ावा देने संबंधी विनियम, 2026 को लेकर सामान्य वर्ग के छात्रों की ओर से व्यापक आलोचना की जा रही है। उनका तर्क है कि यह ढांचा उनके खिलाफ भेदभाव को बढ़ावा दे सकता है।
उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को परिसरों में जातिगत भेदभाव को रोकने से जुड़े हालिया विनियमों पर यह कहते हुए रोक लगा दी थी कि ये प्रथम दृष्टया “अस्पष्ट” हैं और ‘‘उनके दुरुपयोग की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।’’
आइसा के राज्य सचिव त्रिलोकनाथ ने कहा कि परिसरों में जातिगत भेदभाव के साथ-साथ नस्लीय भेदभाव भी होता है।