बीजबेहरा/अनंतनाग (जम्मू-कश्मीर)
जम्मू-कश्मीर में तीन रेलवे परियोजनाओं को फिलहाल स्थगित करने के केंद्र सरकार के फैसले पर अनंतनाग जिले के लोगों ने संतोष और खुशी जताई है। रेल मंत्री Ashwini Vaishnaw की घोषणा के बाद क्षेत्र के निवासियों ने इसे स्थानीय हितों के पक्ष में लिया गया “समझदारी भरा कदम” बताया है।
अनंतनाग के बीजबेहरा इलाके के वीरी गांव के निवासी अजाज़ अहमद ने ANI से बातचीत में कहा कि इस फैसले से पूरे क्षेत्र को बड़ी राहत मिली है। उन्होंने बताया कि वीरी गांव में कृषि भूमि, रिहायशी जमीन और सेब के बाग—तीनों तरह की भूमि मौजूद हैं, जिन पर प्रस्तावित रेलवे लाइन का सीधा असर पड़ रहा था।
अजाज़ अहमद ने कहा, “हम रेल मंत्री के आभारी हैं कि उन्होंने हमारी बात सुनी। यह एक सही और दूरदर्शी फैसला है। इस इलाके में खेती और बागवानी ही लोगों की रोज़ी-रोटी का मुख्य साधन है। अगर रेलवे लाइन बनती, तो यहां की ज़मीन और बागों को भारी नुकसान होता।”
स्थानीय लोगों का कहना है कि रेलवे परियोजनाओं का असर सिर्फ एक गांव तक सीमित नहीं था, बल्कि पूरा अनंतनाग क्षेत्र इससे प्रभावित हो रहा था। एक अन्य निवासी ने बताया कि यह फैसला पिहलगाम तक के इलाकों के लोगों के लिए राहत लेकर आया है।
उन्होंने कहा, “रेलवे लाइन से केवल हमारा गांव ही नहीं, बल्कि आसपास का पूरा इलाका प्रभावित हो रहा था। जैसे ही यह खबर आई कि परियोजनाएं रोकी गई हैं, हर कोई खुश है। हम केंद्र सरकार के शुक्रगुज़ार हैं कि उसने जनता की आवाज़ को गंभीरता से सुना।”
इससे पहले मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया था कि Baramulla से Srinagar रेलवे मार्ग पर दो से तीन अतिरिक्त रेल लाइनों के निर्माण की मांग उठी थी। इस मांग पर सर्वे भी शुरू किए गए थे। हालांकि, राज्य सरकार और संसद सदस्यों के साथ विचार-विमर्श के बाद यह निर्णय लिया गया कि फिलहाल इन लाइनों का निर्माण नहीं किया जाएगा।
रेल मंत्री ने स्पष्ट किया कि जिन तीन परियोजनाओं पर सर्वे शुरू हुआ था, उनसे सेब के बागों को नुकसान पहुंचने की आशंका थी। कश्मीर घाटी में सेब की खेती लाखों लोगों की आजीविका से जुड़ी हुई है। इसी कारण संभावित पर्यावरणीय और आर्थिक नुकसान को देखते हुए इन परियोजनाओं को रोकने का फैसला किया गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय विकास और स्थानीय हितों के बीच संतुलन साधने का उदाहरण है। अनंतनाग और आसपास के क्षेत्रों में लोगों को उम्मीद है कि भविष्य में किसी भी बड़े बुनियादी ढांचे की योजना बनाते समय स्थानीय भूगोल, पर्यावरण और आजीविका को प्राथमिकता दी जाएगी।
फिलहाल, रेलवे परियोजनाओं के स्थगन से अनंतनाग के निवासियों में राहत का माहौल है और केंद्र सरकार के इस कदम को जनभावनाओं के सम्मान के रूप में देखा जा रहा है।




