ओनिका माहेश्वरी/ नई दिल्ली
TVK प्रमुख के तौर पर विजय, DMK के कब्ज़े वाली एक और सीट तिरुचिरापल्ली पूर्वसे भी चुनाव लड़ रहे हैं। दो 'गैर-सुरक्षित' सीटों से चुनाव लड़ने का उनका फ़ैसला एक आक्रामक रणनीति को दर्शाता है, जिसका मकसद अलग-अलग क्षेत्रों में सत्ताधारी दल के मुक़ाबले अपनी लोकप्रियता को परखना है।
तमिलनाडु की राजनीति, जो पिछले कई दशकों से मुख्यतः दो प्रमुख द्रविड़ दलों DMK और AIADMK के इर्द-गिर्द घूमती रही है, उसमें अब अभिनेता विजय एक नए विकल्प के रूप में उभरकर सामने आए हैं। ‘थलपति विजय’ केवल एक फिल्मी सुपरस्टार के रूप में राजनीति में प्रवेश नहीं कर रहे, बल्कि वे एक ऐसे समय में विकल्प बनने की कोशिश कर रहे हैं जब राज्य में युवाओं के बीच “पोस्ट-द्रविड़ एंग्जायटी” यानी आगे की दिशा को लेकर असंतोष और सवाल बढ़ रहे हैं।
करीब 60 सालों से सत्ता की राजनीति दो दलों के बीच सीमित रही है, लेकिन विजय ने अपनी राजनीतिक पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) के जरिए इस ढांचे को चुनौती देने की कोशिश की है। उनका दावा है कि वे जाति, धर्म और परंपरागत विरासत की राजनीति से अलग होकर शासन, भ्रष्टाचार और रोजगार जैसे मुद्दों पर फोकस करेंगे।

22 जून 1974 को जन्मे जोसेफ विजय चंद्रशेखर, जिन्हें दुनिया ‘थलपति विजय’ के नाम से जानती है, एक फिल्मी परिवार से आते हैं। उनके पिता एस. ए. चंद्रशेखर एक निर्देशक हैं और मां शोभा चंद्रशेखर प्लेबैक सिंगर रही हैं। विजय ने बाल कलाकार के रूप में करियर शुरू किया और बाद में 18 साल की उम्र में फिल्म नालया थीरपू से बतौर लीड एक्टर डेब्यू किया। अब तक लगभग 69 फिल्मों में काम कर चुके विजय साउथ सिनेमा के सबसे बड़े सितारों में गिने जाते हैं। उनकी लोकप्रिय फिल्मों में थेरी, राजविन परवैयिले, मिन्सरा कन्ना, बीस्ट, शाहजहां शामिल हैं। साल 2023 में रिलीज लियो ने बॉक्स ऑफिस पर कई रिकॉर्ड तोड़े, जबकि The Greatest of All Time में भी उनके अभिनय की सराहना हुई। डायरेक्टर एटली की फिल्म मर्सल (2017) के बाद उन्हें औपचारिक रूप से ‘थलपति’ यानी लीडर का टाइटल मिला।
फरवरी 2025 में विजय ने अपनी राजनीतिक पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) की घोषणा की और 2026 विधानसभा चुनाव में उतरने का निर्णय लिया। उन्होंने 2024 में एक्टिंग से रिटायरमेंट की घोषणा भी की, जिससे उनके राजनीतिक फोकस को स्पष्ट संकेत मिला। उनकी आखिरी बताई जाने वाली फिल्म जन नायकन (हिंदी अर्थ: ‘जन नेता’) उनके राजनीतिक लॉन्च का प्रतीक मानी जा रही थी। लेकिन यह फिल्म विवादों में फंस गई कभी सेंसर प्रमाणन को लेकर, कभी कोर्ट केस, तो कभी ऑनलाइन लीक और विरोध के कारण।
विजय का फिल्मी करियर कई बार राजनीतिक विवादों से टकराया है। 2013 की फिल्म थलाइवा का टैगलाइन “Time to Lead” तत्कालीन मुख्यमंत्री J. Jayalalithaa की सरकार को आपत्तिजनक लगा और फिल्म मुश्किल से रिलीज हो पाई। 2018 की फिल्म सरकार पर आरोप लगा कि इसमें सरकारी योजनाओं को गलत तरीके से दिखाया गया है, जिसके चलते राजनीतिक दलों ने विरोध किया। इन घटनाओं ने विजय की फिल्मों को सिर्फ मनोरंजन नहीं बल्कि राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बना दिया।
तमिल सिनेमा में सुपरस्टारडम के बावजूद राजनीति में सफलता नहीं मिली दो बड़े नामों को Rajinikanth और Kamal Haasan को। रजनीकांत ने 2017 में राजनीति में आने का संकेत दिया था और उनके फैन क्लब ने Rajini Makkal Mandram बनाकर राजनीतिक ढांचा तैयार करने की कोशिश की, लेकिन अंततः वे वैचारिक स्पष्टता और राजनीतिक रणनीति की कमी के कारण पीछे हट गए। वहीं कमल हासन ने 2018 में अपनी पार्टी मक्कल नीधि मय्यम (MNM) शुरू की, लेकिन मजबूत जमीनी नेटवर्क और राजनीतिक आधार के अभाव में वे प्रभावी जन समर्थन नहीं जुटा पाए।
तमिलनाडु की राजनीति ऐतिहासिक रूप से Dravidian movement से निकली है, जिसने सामाजिक न्याय और पहचान की राजनीति को मजबूत किया। लेकिन आज युवा वर्ग में यह सवाल उभर रहा है कि पहचान की राजनीति के बाद अगला चरण क्या होगा। नौकरियों की कमी, भ्रष्टाचार, और नीति-स्तर पर असंतुलन जैसे मुद्दों ने नई राजनीतिक बेचैनी पैदा की है। इसी पृष्ठभूमि में विजय खुद को एक ऐसे नेता के रूप में पेश कर रहे हैं जो “द्रविड़ विरासत का सम्मान करते हुए आगे की राजनीति” की बात करता है।
विजय की राजनीति किसी पारिवारिक या द्रविड़ राजनीतिक विरासत पर आधारित नहीं है। वे न तो किसी जातीय राजनीति का हिस्सा हैं और न ही धर्म-आधारित एजेंडे का समर्थन करते हैं। उनका फोकस शासन सुधार, भ्रष्टाचार विरोध और युवाओं के लिए अवसरों पर है। वे खुद को उस नई पीढ़ी की आवाज के रूप में पेश कर रहे हैं जो पुराने राजनीतिक विकल्पों से आगे कुछ नया चाहती है।

विजय भारतीय सिनेमा के सबसे अधिक फीस लेने वाले अभिनेताओं में शामिल हैं। वे एक फिल्म के लिए लगभग 65 करोड़ रुपये से अधिक चार्ज करते हैं और उनकी कुल संपत्ति 500 करोड़ रुपये से अधिक बताई जाती है। उनकी निजी जिंदगी भी चर्चा में रही है। उन्होंने 25 अगस्त 1999 को यूके में रहने वाली अपनी एक फैन से शादी की थी। हाल के वर्षों में उनके वैवाहिक जीवन में तनाव और तलाक की अटकलें सामने आई हैं। साथ ही, उनका नाम अभिनेत्री तृषा कृष्णन के साथ भी जोड़ा जाता रहा है, हालांकि इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
विजय की राजनीतिक यात्रा अभी शुरुआती चरण में है, लेकिन तमिलनाडु में उनका प्रवेश उस समय हुआ है जब लोग विकल्प की तलाश में हैं। हालांकि इतिहास बताता है कि फिल्मी स्टारडम अपने आप में राजनीतिक सफलता की गारंटी नहीं है। अब असली परीक्षा यह होगी कि क्या वे अपने करिश्मे को जमीन पर वोटों में बदल पाते हैं या फिर यह भी उन प्रयोगों की सूची में शामिल होगा जो तमिल राजनीति में पहले देखे जा चुके हैं।
अभिनेता से नेता बने विजय ने 2026 तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के अपने हलफनामे में अपनी कुल संपत्ति लगभग ₹603 करोड़ से ₹625 करोड़ के बीच घोषित की है। यह उन्हें भारत के सबसे अधिक संपत्ति वाले अभिनेताओं-राजनेताओं में शामिल करता है। उनकी कुल संपत्ति में लगभग ₹404 करोड़ की चल संपत्तियाँ शामिल हैं, जिनमें बैंक जमा, शेयर और लग्जरी कारें शामिल हैं, जबकि ₹200 करोड़ से अधिक की अचल संपत्तियाँ हैं, जिनमें वाणिज्यिक इमारतें, कृषि भूमि और आवासीय संपत्तियाँ शामिल हैं।
उनकी प्रमुख संपत्तियों में चेन्नई के नीलांकरई क्षेत्र में स्थित एक समुद्र किनारे बना बंगलो शामिल है, जिसकी अनुमानित कीमत ₹70 से ₹80 करोड़ के बीच बताई जाती है। आय के स्रोतों की बात करें तो रिपोर्टों के अनुसार विजय एक फिल्म के लिए लगभग ₹130 करोड़ से लेकर ₹250 करोड़ तक फीस लेते हैं, और वित्त वर्ष 2024-25 में उनकी अनुमानित आय ₹184.53 करोड़ बताई गई है।
उनके निवेश पोर्टफोलियो में बैंक डिपॉजिट और अन्य वित्तीय निवेशों के साथ-साथ एक लग्जरी कार कलेक्शन भी शामिल है, जिसकी कीमत ₹8 करोड़ से अधिक बताई जाती है। इस कलेक्शन में BMW i7 और Rolls-Royce Ghost जैसी हाई-एंड कारें शामिल हैं, जो उनकी भव्य जीवनशैली और आर्थिक ताकत को दर्शाती हैं।