नई दिल्ली
बॉलीवुड अभिनेता इमरान खान ने हाल ही में अपने जीवन के उस दौर पर खुलकर बात की है, जब उन्होंने अचानक फिल्मों से दूरी बना ली थी। फिल्म जाने तू… या जाने ना से शाही अंदाज़ में डेब्यू कर रातोंरात स्टार बने इमरान खान एक दशक से अधिक समय तक सिल्वर स्क्रीन से गायब रहे। अब उन्होंने इस लंबे ब्रेक के पीछे की वजह बताते हुए अपने निजी जीवन, तलाक और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े संघर्षों पर ईमानदारी से बात की है।
टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए एक साक्षात्कार में इमरान खान ने कहा कि फिल्मों से दूर होना कोई अचानक लिया गया या अस्थायी फैसला नहीं था, बल्कि यह उनके लिए खुद को दोबारा समझने और जीवन को नए सिरे से तलाशने की प्रक्रिया थी। उन्होंने स्वीकार किया कि उस समय उनका जीवन भीतर से बिखर चुका था।
इमरान के शब्दों में, “मुझे एहसास हुआ कि मेरे जीवन में कुछ भी ठीक नहीं चल रहा था। यह मेरे लिए एक तरह का ‘जागरूकता का संदेश’ था, जिसने मुझे रुकने और खुद को देखने पर मजबूर किया।”
अपने मानसिक स्वास्थ्य के बारे में बात करते हुए इमरान खान ने इसकी तुलना शारीरिक बीमारी से की। उन्होंने कहा, “जैसे जब शरीर ठीक नहीं होता, तो हम अपना खान-पान बदल लेते हैं, हल्का और सादा भोजन करने लगते हैं। ठीक उसी तरह, मेरी मानसिक स्थिति के साथ भी था। सबसे ज़रूरी बात यह समझना था कि मैं ठीक नहीं हूँ।”
उन्होंने आगे बताया कि बाहर से वे खुद को हमेशा शांत और सहज स्वभाव का व्यक्ति मानते थे, लेकिन हकीकत कुछ और थी। “मुझे लगता था कि मैं बहुत कूल हूं, लेकिन बाद में समझ आया कि मैं वैसा नहीं था। लोगों के साथ मेरा व्यवहार मेरे असली स्वभाव से मेल नहीं खाता था। मैं अपने भीतर डर और चिंता छिपाए हुए था। बाहर से शांत दिखता था, लेकिन अंदर से पूरी तरह बेचैन था,” इमरान ने कहा।
गौरतलब है कि आमिर खान के भतीजे इमरान खान ने 2007 में बॉलीवुड में कदम रखा था। जाने तू… या जाने ना जैसी सुपरहिट फिल्म और दिल्ली बेली जैसी कल्ट क्लासिक देने के बावजूद, उनकी बाद की कई फिल्में बॉक्स ऑफिस पर उम्मीदों पर खरी नहीं उतर सकीं। करियर में लगातार असफलताओं और निजी जीवन में आए उतार-चढ़ाव ने उन्हें मानसिक रूप से काफी प्रभावित किया।
हालांकि, इमरान खान का यह बयान नकारात्मकता से ज़्यादा आत्मस्वीकृति और जागरूकता का संकेत देता है। मनोरंजन जगत में मानसिक स्वास्थ्य पर खुलकर बात करना अब भी आसान नहीं माना जाता, ऐसे में एक अभिनेता का अपनी कमजोरियों को स्वीकार करना कई लोगों के लिए प्रेरणा बन सकता है।
इमरान खान की यह स्वीकारोक्ति इस बात का संदेश देती है कि सफलता, शोहरत और चमक-दमक के पीछे भी इंसान का अपना संघर्ष होता है—और उससे उबरने की पहली शर्त है, खुद से सच बोलने की हिम्मत।