‘अवारापन 2’ : इमरान हाशमी का जादू, कहानी कमजोर

Story by  एटीवी | Published by  [email protected] | Date 15-08-2026
‘Awarapan 2’: Emraan Hashmi’s magic, weak story.
‘Awarapan 2’: Emraan Hashmi’s magic, weak story.

 

आवाज द वॉयस | नई दिल्ली

‘अक्का बॉलीवुड एक तरफ और इमरान हाशमी एक तरफ’—यह लाइन ‘अवारापन 2’ देखने के बाद एक बार फिर याद आती है। इमरान हाशमी की स्क्रीन मौजूदगी आज भी उतनी ही असरदार है, लेकिन समस्या यह है कि जिस कहानी के लिए वह लौटे हैं, वह उस पुराने ‘अवारापन’ की आत्मा तक नहीं पहुंच पाती।

निर्देशक नितिन कक्कर की ‘अवारापन 2’ 14 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज हुई। इमरान हाशमी के प्रशंसकों में फिल्म को लेकर जबरदस्त उत्सुकता थी। शिवम पंडित की वापसी, पुराने गानों की याद और पहली फिल्म से जुड़ी भावनाओं ने दर्शकों को थिएटर तक पहुंचाया। लेकिन करीब ढाई घंटे की यह फिल्म कई जगह उम्मीदों पर खरी नहीं उतरती।

इमरान हाशमी अब भी शिवम हैं

फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इमरान हाशमी हैं। वह लगभग पूरी फिल्म में छाए रहते हैं और शिवम पंडित के किरदार में दोबारा उतरते हुए बिल्कुल सहज नजर आते हैं। लंबे बाल, उदास आंखें, खामोशी और भीतर छिपा दर्द—इमरान के अभिनय में वह पुराना शिवम अब भी दिखाई देता है।

कहानी में शिवम आज भी आलिया की मौत के दर्द से बाहर नहीं निकल पाया है। वह उसकी कब्र पर जाता रहता है। आलिया के जन्मदिन पर उसे एक लावारिस बच्ची मिलती है, जिसका नाम वह आलिया रख देता है। लेकिन वह बच्ची भी बाद में गोद ले ली जाती है।

इसके बाद इंटरपोल अधिकारी समर्थ के जरिए शिवम फिर उसी दुनिया में लौटता है, जिसे वह पीछे छोड़ चुका था। बैंकॉक में ड्रग्स, गैंगस्टर और अपराध की दुनिया उसका इंतजार कर रही होती है।

कहानी में ‘अवारापन’ वाली आत्मा गायब

यही फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी है। इमरान में अवारापन है, लेकिन कहानी में नहीं।

पहली ‘अवारापन’ की खासियत सिर्फ अपराध या एक्शन नहीं थी। उसमें दर्द, मोहब्बत, संगीत, खामोशी और भावनात्मक जुड़ाव था। ‘अवारापन 2’ में बड़े स्तर का एक्शन, बैंकॉक की लोकेशन और बेहतर प्रोडक्शन जरूर है, लेकिन कहानी कई जगह सामान्य क्राइम-एक्शन फिल्म जैसी लगने लगती है।

फिल्म में कई ट्विस्ट हैं, लेकिन उनमें से कई आसानी से अनुमान लगाए जा सकते हैं। संवाद कहीं असरदार हैं तो कहीं कमजोर। सबसे बड़ी परेशानी लगातार होने वाले एक्शन दृश्यों से होती है। लगभग हर 15-20 मिनट में गोलीबारी शुरू हो जाती है। दूसरे हाफ में फिल्म की रफ्तार भी कमजोर पड़ती है और लंबा क्लाइमेक्स धैर्य की परीक्षा लेने लगता है।

पुराने गाने लौटाते हैं पुरानी यादें

जहां कहानी कमजोर पड़ती है, वहां फिल्म का नॉस्टेल्जिया संभाल लेता है। श्रीया सरन की आलिया जब फ्लैशबैक में दिखाई देती हैं तो दर्शक सीधे पहली फिल्म की दुनिया में पहुंच जाते हैं।

इसके बाद ‘तो फिर आओ’ और ‘तेरा मेरा रिश्ता’ सुनाई देते हैं। खासकर ‘तेरा मेरा रिश्ता’ आज भी भावनात्मक असर पैदा करता है। हालांकि ‘तो फिर आओ’ को फिल्म में और मजबूत तरीके से इस्तेमाल किया जा सकता था।

फिल्म की सिनेमैटोग्राफी भी अच्छी है। सुबह के दृश्य, ग्रहण वाले सीक्वेंस और बैंकॉक की लोकेशन कहानी को खूबसूरत विजुअल देते हैं।

शबाना आजमी ने जीता दिल

शबाना आजमी फिल्म में गैंगस्टर क्वीन नफीसा की भूमिका में हैं और आते ही अपनी मौजूदगी दर्ज कराती हैं। बिना ज्यादा शोर किए उनका किरदार प्रभाव छोड़ता है। हालांकि कहानी उन्हें और ज्यादा जगह देती तो फिल्म को फायदा होता।

पूरन गब्बी जोरावर के किरदार में प्रभावी हैं, हालांकि कुछ जगह उनका अभिनय जरूरत से ज्यादा आक्रामक लगता है। सुविंदर विक्की अपने किरदार में भरोसेमंद हैं, जबकि विजयंते कोहली भी खलनायक की भूमिका में ध्यान खींचते हैं।

दिशा पाटनी जारा के किरदार में ठीक हैं और इमरान के साथ उनके कुछ दृश्य अच्छे बन पड़े हैं। लेकिन उनके किरदार को ज्यादा गहराई दी जा सकती थी।

क्या फिल्म देखनी चाहिए?

‘अवारापन 2’ पूरी तरह खराब फिल्म नहीं है। इमरान हाशमी के प्रशंसकों और पहली फिल्म से भावनात्मक जुड़ाव रखने वालों के लिए यह एक बार देखी जा सकती है।

क्या अच्छा है: इमरान हाशमी, पुरानी यादें, संगीत, सिनेमैटोग्राफी और कुछ कलाकारों का अभिनय।

क्या कमजोर है: स्क्रीनप्ले, अनुमान लगाने योग्य ट्विस्ट, बार-बार होने वाला एक्शन, असमान संवाद और लंबा दूसरा हिस्सा।

पहली फिल्म की आत्मा और संगीत का जादू अब भी ज्यादा मजबूत है। ‘अवारापन 2’ बड़े पैमाने और बेहतर प्रोडक्शन के बावजूद उस भावनात्मक गहराई को हासिल नहीं कर पाती।

अंतिम कुछ मिनट साफ संकेत देते हैं कि ‘अवारापन 3’ का रास्ता खुला है। लेकिन सवाल यही है—क्या हमें सच में तीसरा भाग चाहिए?

फैसला: इमरान हाशमी के लिए थिएटर जा सकते हैं, लेकिन पहली ‘अवारापन’ जैसी उम्मीद लेकर नहीं। कभी-कभी कुछ कहानियों को वहीं छोड़ देना बेहतर होता है, जहां उन्होंने दर्शकों के दिल में अपनी जगह बनाई थी।