1 नवंबर से कॉलर ID में कॉलर के नाम दिखेंगे: DoT

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  onikamaheshwari | Date 15-10-2026
Caller names to show in caller ID from November 1: DoT
Caller names to show in caller ID from November 1: DoT

 

नई दिल्ली

दूरसंचार विभाग (DoT) ने भारत में कॉलर की पहचान (कॉलर आइडेंटिफिकेशन) से जुड़े नियमों में संशोधन किया है। इसके तहत, 1 नवंबर 2026 से कॉलर की पहचान में उसका नाम भी शामिल किया जा सकेगा, जो टेलीकॉम ऑपरेटरों के सब्सक्राइबर रिकॉर्ड में दर्ज है। यह बदलाव 'यूनिफाइड लाइसेंस एग्रीमेंट' (Unified Licence Agreement) में संशोधन के जरिए किया गया है, जिससे 'कॉलिंग लाइन आइडेंटिफिकेशन' (CLI) की परिभाषा अपडेट हो गई है। नई परिभाषा के अनुसार, कॉलर की पहचान में टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर द्वारा दिया गया टेलीफोन आइडेंटिफायर, उनके रिकॉर्ड में दर्ज सब्सक्राइबर का नाम, या लाइसेंस देने वाली अथॉरिटी (licensor) द्वारा तय की गई कोई अन्य पहचान शामिल हो सकती है।
 
इससे पहले, इस परिभाषा में मुख्य रूप से टेलीफोन नंबर, IP एड्रेस या लाइसेंस देने वाली अथॉरिटी द्वारा तय किसी अन्य तरीके से सब्सक्राइबर की पहचान शामिल थी। संशोधित परिभाषा में स्पष्ट रूप से सब्सक्राइबर के रजिस्टर्ड नाम को भी कॉलर की पहचान का एक हिस्सा माना गया है। DoT के अनुसार, यह संशोधन 'यूनिफाइड लाइसेंस एग्रीमेंट' के प्रावधानों के तहत किया गया है। इन प्रावधानों के अनुसार, जनहित में, राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए, या दूरसंचार सेवाओं के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के लिए लाइसेंस की शर्तों में बदलाव किया जा सकता है। यह नई परिभाषा 'यूनिफाइड लाइसेंस एग्रीमेंट' के मौजूदा प्रावधान की जगह लेगी और 1 नवंबर 2026 से लागू होगी।
 
दूरसंचार विभाग ने कहा, "कॉलिंग लाइन आइडेंटिफिकेशन का मतलब है - टेलीकॉम सर्विस देने वाले ऑपरेटर द्वारा कॉलर को दिया गया टेलीफोन आइडेंटिफायर; या सब्सक्राइबर डेटा रिकॉर्ड में दर्ज कॉलर का नाम; या कोई अन्य ऐसी पहचान जिसे लाइसेंस देने वाली अथॉरिटी समय-समय पर तय करे।" हालांकि, इस संशोधन में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि क्या टेलीकॉम ऑपरेटरों के लिए कॉल पाने वाले व्यक्ति की फोन स्क्रीन पर कॉलर का नाम दिखाना अनिवार्य होगा, या यह प्रक्रिया किस तरह काम करेगी।