आतिर खान
देश को बनाने में भारतीय मुस्लिम महिलाओं की भूमिका हमारे इतिहास का एक अहम हिस्सा रही है। अक्सर इस पर उतना ध्यान नहीं दिया गया जितना मिलना चाहिए था। देश की तरक्की और विकास में उनके योगदान को पहचानना और उसका जश्न मनाना बहुत ज़रूरी है। वे लगातार भारत के सामाजिक और राजनीतिक ढांचे को संवार रही हैं।
बाकी समाज की महिलाओं की तरह ही मुस्लिम महिलाओं की उपलब्धियों को भी हमेशा वह दर्जा नहीं मिला जिसकी वे हकदार थीं। हालांकि इस्लाम की मूल शिक्षाओं ने महिलाओं को राजनीति, व्यापार और विरासत जैसे क्षेत्रों में बड़े अधिकार दिए थे। सशक्तिकरण के इन सिद्धांतों ने आगे बढ़ने की बुनियाद तो रखी, लेकिन खुद समुदाय के भीतर गलत प्राथमिकताओं की वजह से मुस्लिम महिलाओं की असली काबिलियत अक्सर दबकर रह गई।
भारत एक ऐसा देश है जहाँ सबको बराबर के मौके मिलते हैं। यहाँ मुस्लिम महिलाओं को हर क्षेत्र में आगे बढ़ने का अवसर मिला है। इतिहास गवाह है कि बेगम हज़रत महल और बी अम्मा जैसी क्रांतिकारी नेताओं ने भारत की आज़ादी की लड़ाई में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। उन्होंने बहादुरी और संघर्ष की एक मिसाल पेश की।
इन शुरुआती महिलाओं ने आने वाली पीढ़ियों के लिए रास्ता बनाया। आज़ादी के बाद भी कई शानदार नाम सामने आए। फातिमा बीवी भारत के सुप्रीम कोर्ट की पहली महिला जज बनीं। हैदराबाद की डॉ. मरियम अफीफा अंसारी पहली महिला न्यूरोसर्जन बनीं। इनके काम का असर बहुत गहरा रहा है।
असम की मुख्यमंत्री रहीं सैयदा अनवरा तैमूर राजनीति में नेतृत्व की मिसाल हैं। वहीं कुर्रतुलएन हैदर, मधुबाला और बेगम अख्तर जैसी शख्सियतों ने कला और संस्कृति की दुनिया में पीढ़ियों को प्रेरित किया है।
आज भी भारतीय मुस्लिम महिलाएं राजनीति, बिजनेस, खेल, पढ़ाई और कला जैसे क्षेत्रों में पुरानी बेड़ियों को तोड़ रही हैं। उनकी हिम्मत और कामयाबी की कहानियाँ न केवल महिलाओं को बल्कि समाज के हर इंसान को प्रेरणा देती हैं।
हम 'आवाज़-द वॉयस' में अपनी 'चेन्जमेकर्स' सीरीज को मिले प्यार के लिए आप सभी के शुक्रगुजार हैं। इस सीरीज में हमने समाज के लिए अच्छा काम करने वाले मुस्लिमों की कहानियाँ दिखाई थीं। हमें मिलने वाले ढेरों ईमेल और फोन कॉल्स बताते हैं कि ऐसी कामयाबियों को दुनिया के सामने लाना कितना ज़रूरी है।
पत्रकारिता को सबके लिए समावेशी बनाने की अपनी कोशिश में हम आज से एक नई सीरीज 'परवाज़' शुरू कर रहे हैं। इसमें हम अलग-अलग क्षेत्रों में नाम कमाने वाली आज की भारतीय मुस्लिम महिलाओं की उपलब्धियों को दिखाएंगे। यह उनके संघर्ष और उनकी कामयाबी को एक सच्ची श्रद्धांजलि होगी। हमें उम्मीद है कि यह दूसरों के लिए भी प्रेरणा का काम करेगी।
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परवाज़' की शुरुआत आज राजनीति में सक्रिय मुस्लिम महिलाओं पर एक खास फीचर के साथ हो रही है। इसके बाद हम अन्य क्षेत्रों की महिलाओं पर भी चर्चा करेंगे। हम चाहेंगे कि आप अपनी राय और सुझाव हमें [email protected] पर लिखकर भेजें।
प्रधान संपादक