खालिदा जिया के निधन पर दक्षिण एशिया एकजुट, ‘दक्षेस की भावना’ अब भी जीवित: मुहम्मद यूनुस

Story by  एटीवी | Published by  [email protected] | Date 02-01-2026
South Asia unites in mourning over the death of Khaleda Zia, 'the spirit of SAARC' is still alive: Muhammad Yunus
South Asia unites in mourning over the death of Khaleda Zia, 'the spirit of SAARC' is still alive: Muhammad Yunus

 

ढाका

बांग्लादेश सरकार के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस ने कहा है कि पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के निधन पर पूरे दक्षिण एशिया का एकजुट होकर शोक व्यक्त करना इस बात का प्रमाण है कि “दक्षेस की भावना आज भी जीवित है।” उन्होंने रेखांकित किया कि इस कठिन क्षण में क्षेत्र के देशों ने मानवीय संवेदना और पारस्परिक सम्मान का परिचय दिया।

यूनुस की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब बुधवार को ढाका में खालिदा जिया के अंतिम संस्कार में दक्षिण एशिया के कई शीर्ष नेताओं ने शिरकत की। भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर सहित पड़ोसी देशों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी ने क्षेत्रीय एकजुटता का संदेश दिया। मुख्य सलाहकार के कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि यूनुस तीन बार की प्रधानमंत्री रहीं खालिदा जिया—जो दुनिया की दूसरी महिला मुस्लिम राष्ट्राध्यक्ष भी थीं—के प्रति दक्षेस सदस्य देशों द्वारा दिखाए गए सम्मान से “बेहद भावुक” हैं।

बयान के अनुसार, अंतिम संस्कार के अवसर पर दक्षिण एशियाई नेताओं के साथ हुई मुलाकातों के दौरान यूनुस ने बार-बार दक्षेस (दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन) को पुनर्जीवित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के सामने साझा चुनौतियाँ—आर्थिक विकास, मानवीय संकट, शिक्षा और कौशल—तभी प्रभावी ढंग से सुलझाई जा सकती हैं, जब सहयोग और संवाद को आगे बढ़ाया जाए।

यूनुस ने गुरुवार को मालदीव के उच्च शिक्षा, श्रम और कौशल विकास मंत्री अली हैदर अहमद के साथ बैठक में कहा, “कल के अंतिम संस्कार कार्यक्रम में हमने दक्षेस की सच्ची भावना देखी। यह स्पष्ट करता है कि दक्षेस की भावना अब भी जीवित है।” उनके मुताबिक, इस तरह के मानवीय क्षण क्षेत्रीय मंचों को पुनर्जीवित करने के लिए आधार बन सकते हैं।

दक्षेस में अफगानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, भारत, मालदीव, नेपाल, पाकिस्तान और श्रीलंका शामिल हैं। हालांकि, यह संगठन वर्ष 2016 से लगभग निष्क्रिय है। इसका आखिरी द्विवार्षिक शिखर सम्मेलन 2014 में काठमांडू में हुआ था। 2016 में इस्लामाबाद में प्रस्तावित शिखर सम्मेलन में भारत के शामिल न होने और बाद में बांग्लादेश, भूटान तथा अफगानिस्तान के भी इनकार के बाद बैठक रद्द कर दी गई थी।

भारत ने दक्षेस को तत्काल सक्रिय करने की संभावना को खारिज किया है। बावजूद इसके, यूनुस का मानना है कि खालिदा जिया के अंतिम संस्कार पर दिखी क्षेत्रीय एकजुटता यह संकेत देती है कि राजनीतिक मतभेदों के बीच भी मानवीय और सांस्कृतिक रिश्ते दक्षिण एशिया को जोड़ सकते हैं।