नई दिल्ली।
वैश्विक स्तर पर व्यापक रूप से उद्धृत ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल द्वारा हर साल जारी किए जाने वाले करप्शन परसेप्शन इंडेक्स (CPI) में पाकिस्तान की स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है। पाकिस्तान के मीडिया में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024 के लिए इस सूचकांक में पाकिस्तान को 180 देशों में 135वां स्थान दिया गया है, जो देश में बढ़ते भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।
पाकिस्तान के वित्तीय अख़बार बिज़नेस रिकॉर्डर में प्रकाशित लेख में कहा गया है कि पाकिस्तान की रैंकिंग में पिछले एक दशक के दौरान स्पष्ट गिरावट देखने को मिली है। वर्ष 2015 में पाकिस्तान 168 देशों में 117वें स्थान पर था, जो 70वें पर्सेंटाइल के बराबर था। इसके मुकाबले अब पाकिस्तान की स्थिति और खराब हो गई है। यह गिरावट हाल ही में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की रिपोर्ट में व्यक्त चिंताओं को भी सही ठहराती है, जिसमें पाकिस्तान में भ्रष्टाचार की समस्या को रेखांकित किया गया है।
भ्रष्टाचार के अलावा, पाकिस्तान का प्रदर्शन मानव विकास के मोर्चे पर भी निराशाजनक बताया गया है। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) द्वारा जारी ह्यूमन डेवलपमेंट इंडेक्स (HDI) में भी पाकिस्तान की रैंकिंग काफी नीचे है। यह सूचकांक शिक्षा, स्वास्थ्य और प्रति व्यक्ति आय—इन तीन प्रमुख घटकों पर आधारित होता है। रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिण एशिया के देशों में पाकिस्तान की स्थिति सबसे निचले पायदान पर है और उसे ‘निम्न मानव विकास’ श्रेणी में रखा गया है। खास तौर पर शिक्षा के क्षेत्र में पाकिस्तान की रैंकिंग सबसे खराब बताई गई है।
आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2015 में पाकिस्तान 188 देशों में 147वें स्थान पर था, जो 78वें पर्सेंटाइल के बराबर था। अब यह स्थिति और बिगड़कर 87वें पर्सेंटाइल तक पहुंच गई है, जो बीते दस वर्षों में मानव विकास के क्षेत्र में कमजोर प्रदर्शन को दर्शाता है।
लेख में पाकिस्तान की साख (क्रेडिट रेटिंग) का भी उल्लेख किया गया है, जो एसएंडपी और मूडीज़ जैसी अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसियों के आकलन पर आधारित है। एसएंडपी ने पाकिस्तान को B- और मूडीज़ ने Caa रेटिंग दी है, जबकि DBRS की ओर से कोई रेटिंग नहीं दी गई। कुल मिलाकर पाकिस्तान का स्कोर 100 में से 21 रहा है और 155 देशों में उसका स्थान 131वां है, जो 84वें पर्सेंटाइल में आता है। यह स्थिति पाकिस्तान की कमजोर आर्थिक विश्वसनीयता को दर्शाती है।
हालांकि, लेख में यह उम्मीद भी जताई गई है कि यदि IMF कार्यक्रम सफलतापूर्वक जारी रहता है और विदेशी मुद्रा भंडार में सुधार होता है, तो वर्ष 2026 तक पाकिस्तान की रेटिंग में कुछ सुधार देखने को मिल सकता है।






.png)