दुबई/तेहरान,
ईरान में खराब होती आर्थिक स्थिति के खिलाफ़ शुरू हुए विरोध प्रदर्शन अब राजधानी तेहरान से निकलकर ग्रामीण और प्रांतीय इलाकों तक फैल गए हैं। गुरुवार को सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़पों में कम से कम छह लोगों की मौत की खबर है। अधिकारियों के अनुसार, यह मौतें सुरक्षा बलों और आम नागरिकों—दोनों से जुड़ी हैं, जो हालात के और सख्त होने के संकेत दे रही हैं।
समाचार एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस (AP) के मुताबिक, बुधवार को एक और गुरुवार को पांच मौतें दर्ज की गईं। ये घटनाएं मुख्य रूप से उन शहरों में हुईं, जहां ईरान के लुर (Lur) जातीय समुदाय की आबादी अधिक है। विश्लेषकों का मानना है कि यह 2022 के बाद ईरान में सबसे बड़े विरोध प्रदर्शनों का दौर है, हालांकि फिलहाल यह आंदोलन पूरे देश में एक साथ नहीं फैला है।
सबसे अधिक हिंसा अज़ना शहर में देखने को मिली, जो लोरेस्तान प्रांत में तेहरान से लगभग 300 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में स्थित है। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में सड़कों पर आगजनी, गोलियों की आवाज़ और “बेशर्म, बेशर्म” जैसे नारे सुनाई देते हैं। अर्ध-सरकारी फार्स न्यूज़ एजेंसी ने यहां तीन लोगों की मौत की पुष्टि की है, हालांकि सरकारी मीडिया ने हिंसा को लेकर पूरी जानकारी नहीं दी।
इसी तरह लॉर्डेगान (चहारमहल व बख़्तियारी प्रांत) में भी प्रदर्शन हुए, जहां गोलीबारी की आवाज़ों के बीच लोगों को सड़कों पर इकट्ठा होते देखा गया। फार्स के अनुसार, यहां दो लोगों की मौत हुई। वहीं, वॉशिंगटन स्थित अब्दोर्रहमान बोरूमंद सेंटर फॉर ह्यूमन राइट्स ने दावा किया कि मारे गए लोग प्रदर्शनकारी थे।
एक अन्य घटना में बुधवार रात कूहदश्त शहर में हुए प्रदर्शन के दौरान अर्धसैनिक बल बसीज का 21 वर्षीय स्वयंसेवक मारा गया। सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए ने मौत की पुष्टि की, जबकि प्रांतीय उप-राज्यपाल सईद पूरअली ने प्रदर्शनकारियों को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने बताया कि 13 अन्य बसीज सदस्य और पुलिसकर्मी घायल हुए हैं।
ईरानी अधिकारियों का कहना है कि ये प्रदर्शन महंगाई, बेरोज़गारी और मुद्रा के तेज़ अवमूल्यन से उपजे हैं। वर्तमान में एक अमेरिकी डॉलर की कीमत लगभग 14 लाख रियाल तक पहुंच गई है। सुधारवादी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने स्वीकार किया है कि आर्थिक हालात बेहद चुनौतीपूर्ण हैं और सरकार के पास त्वरित समाधान सीमित हैं।
प्रदर्शनकारियों के नारे अब केवल आर्थिक मुद्दों तक सीमित नहीं रहे, बल्कि ईरान की धार्मिक सत्ता व्यवस्था के खिलाफ़ भी सुनाई दे रहे हैं। तुलना की जा रही है 2022 के उस आंदोलन से, जो महसा अमिनी की पुलिस हिरासत में मौत के बाद भड़का था। हालांकि मौजूदा आंदोलन उतना व्यापक नहीं है, लेकिन इसके फैलाव और बढ़ती हिंसा ने ईरानी नेतृत्व और अंतरराष्ट्रीय समुदाय—दोनों की चिंताएं बढ़ा दी हैं।






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