बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं पर एक और हमला, दो हफ्तों में चौथी हिंसक घटना

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 02-01-2026
Another attack on minority Hindus in Bangladesh, the fourth violent incident in two weeks.
Another attack on minority Hindus in Bangladesh, the fourth violent incident in two weeks.

 

ढाका।

बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय पर हमलों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताज़ा घटना में 31 दिसंबर को शरीयतपुर ज़िले में एक 50 वर्षीय हिंदू व्यक्ति को कथित तौर पर आग के हवाले कर दिया गया। यह पिछले दो हफ्तों में अल्पसंख्यकों पर हुई चौथी हिंसक वारदात बताई जा रही है, जिसने देश में कानून-व्यवस्था और धार्मिक सहिष्णुता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पीड़ित की पहचान खोकन चंद्र दास के रूप में हुई है, जो एक मेडिकल स्टोर चलाते हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, जब वे दुकान बंद कर घर लौट रहे थे, तभी एक भीड़ ने उन पर हमला कर दिया। हमलावरों ने पहले चाकू से वार किया और फिर उन्हें आग लगा दी। गंभीर स्थिति के बावजूद खोकन चंद्र ने पास के एक तालाब में कूदकर किसी तरह अपनी जान बचाई। इस घटना की जानकारी एनडीटीवी ने दी है।

हमले में खोकन चंद्र दास के पेट के निचले हिस्से और सिर में गंभीर चोटें आई हैं। उन्हें तुरंत ढाका मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है। पीड़ित के परिवार ने इस हमले को लेकर न्याय की मांग की है। उनकी पत्नी ने कहा, “मेरे पति एक साधारण इंसान हैं। उन्होंने कभी किसी का नुकसान नहीं किया। मुझे नहीं पता कि यह हमला किसने और क्यों किया।”

गौरतलब है कि दिसंबर से ही बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। इससे पहले 25 वर्षीय दीपु चंद्र दास को कथित ईशनिंदा के आरोप में एक मुस्लिम भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला था। आरोप है कि हत्या के बाद उसके शव को पेड़ से लटकाकर आग लगा दी गई। इसके एक सप्ताह बाद ही 29 वर्षीय अमृत मंडल की भी कलिमोहर यूनियन के होसैनडांगा इलाके में हत्या कर दी गई थी।

इन घटनाओं को लेकर भारत ने लगातार चिंता जताई है और बांग्लादेश में हिंदुओं, ईसाइयों और बौद्धों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया है। हालांकि, बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने भारत की प्रतिक्रिया को “गलत, बढ़ा-चढ़ाकर पेश की गई और भ्रामक” बताया है।

इस बीच, बांग्लादेश की निर्वासित पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने मौजूदा मोहम्मद यूनुस सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इन मौतों को “कानून-व्यवस्था के पूरी तरह ध्वस्त होने” का संकेत बताते हुए आरोप लगाया कि सरकार धार्मिक अल्पसंख्यकों की रक्षा करने में विफल रही है और चरमपंथियों को नीतियों पर हावी होने दे रही है।

लगातार हो रहे इन हमलों ने न केवल बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी देश की छवि पर गंभीर असर डाला है।