हरजिंदर
इन दिनों हम अक्सर नफरत या हेट स्पीच की बात करते हैं, इस्लामफोबिया का जिक्र करते हैं। लेकिन अगर हम नाईजीरिया की ओर देखें तो ये बाते छोटी लगने लगती हैं। पश्चिम अफ्रीका का यह देश न जाने कब से भीषण सांप्रदायिक हिंसा में फंसा हुआ है।
एक अनुमान के अनुसार पिछले एक दशक में ही ऐसी ंिहंसा में यहां 50 हजार से ज्यादा लोगों की हत्या हो चुकी है। हजारों अपहरण हो चुके हैं। एक दो के नहीं अक्सर एक साथ सैकड़ों लोगों का अपहरण कर लिया जाता है। अपहरण किए जाने वालों में सबसे ज्यादा लड़कियां और बच्चे होते हैं।
हिंसा के और भी जितने रूप हैं खासतौर पर औरतों के खिलाफ होने वाली हिंसा के वे सब यहां तकरीबन हर रोज दिखाई देते हैं। नफरत को इतना बोलबाला शायद ही दुनिया में कहीं और दिखाई देता है।

बहुत से लोग नाईजीरिया की आबादी के स्वरूप को ही इसका दोष देते हैं। वहां तकरीबन 53 फीसदी आबादी मुसलमानों की है, जबकि 46 फीसदी ईसाई हैं। इस कारण से नफरत और हिंसा बहुत भीषण हो जाते हैं। लेकिन हिंसा का मूल कारण यही है यह कहना शायद ठीक न होगा।
यहां एक और बात का जिक्र जरूरी है। नाईजीरिया में काफी समय से एक चुनी हुई सरकार है। दिलचस्प बात यह है कि वह सरकार धर्मनिरपेक्षता की बात करती है। जिस आबादी में धार्मिक विभाजन इस तरह का हो वहां ऐसी ही सरकार होनी भी चाहिए।
इसका एक अर्थ यह भी है कि वहां के बहुमत लोग धर्मनिरपेक्षता ही चाहते हैं, इसलिए वे ऐसी ही सरकार को चुनते हैं। लेकिन सिर्फ इतने ही समस्या खत्म नहीं होती। इन्हीं लोगों की बीच ही नफरत को फैलाया और भड़काया जाता है। और अक्सर धर्मनिरेक्ष सरकारें व राजनीतिक दल या तो इस सबके सामने बेबस होते हैं, या इसका फायदा उठाने की कोशिश करते हैं।
Meanwhile, this was in Maiduguri yesterday. It was just one lawmaker, Hon. Satomi, not the President or even the Governor. Some clowns with cameras think they can threaten people on social media.
— Boss Mustapha Z. (@__yellows) September 27, 2026
Where was he when this was happening in Borno yesterday? 🤡 https://t.co/6GgCJgHFUd pic.twitter.com/zYv9kWV7tp
पिछले तकरीबन एक दशक में वहां हिंसा के लिए बोको हरम और इस्लामिक स्टेट जैसे संगठनों के नाम सुनाई देते रहे हैं लेकिन कहा जाता है कि जमीन पर तरह-तरह के बहुत सारे संगठन या शायद गैंग सक्रिय हैं। गैंग शब्द का जिक्र इसलिए भी जरूरी है कि नाईजीरिया का अपराध जगत भी अब इसी हिंसा का हिस्सा बन चुका है। वह धर्म की आड़ में अपने आप को बचाने की कोशिश करता है।
इसी नाईजीरिया में अब एक नई पहल शुरू हुई है। दोनों धर्मों के नेताओं, पादरियों और मौलवियों ने मिलकर तय किया है कि वे इस नफरत से एक साथ लड़ेंगे। उनकी पहली बैठक अगस्त महीने में अबूजा में हुई थी, जहां उन्होंने एक समन्वय समिति बनाई थी।
बाद में उन्होंने एक समझौता भी किया कि वे आपस में मिलकर विवादों का निपटारा करेंगे और सामाजिक सद्भाव के लिए काम करेंगे। इसके बाद इन नेताओं ने सामाजिक अमन के लिए एक जलसा भी किया।

अभी कुछ ही दिन पहले एक दूसरी पहल हुई। इन धर्मों के युवा संगठनों ने आपस में मिलकर एक नेशनल यूथ पीस एकार्ड पर दस्तखत किए। नई पीढ़ी का एक साथ खड़े होना एक उम्मीद तो बंधाता ही है।
पिछले कईं दशक में समस्या इतनी जटिल हो चुकी है कि यह सोच पाना भी मुश्किल है कि इस तरह की पहल से वह खत्म हो जाएगी। अच्छी बात यह जरूर है कि कुछ शुरूआत हो रही है।
( लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)
ALSO READ सिर्फ प्रशिक्षण ही काफी नहीं