नई दिल्ली। कॉफी दुनिया भर में पसंद किए जाने वाले लोकप्रिय पेय पदार्थों में से एक है। सुबह की शुरुआत हो या काम के दौरान थकान दूर करनी हो, बहुत से लोग एक कप कॉफी पीना पसंद करते हैं। कॉफी में मौजूद कैफीन एकाग्रता बढ़ाने और सुस्ती कम करने में मदद करता है। इसके अलावा, कुछ अध्ययनों में कॉफी के सेवन को टाइप-2 डायबिटीज, मस्तिष्क संबंधी बीमारियों और वजन नियंत्रण से जुड़े संभावित फायदों से भी जोड़ा गया है।
हालांकि, कॉफी के फायदे उसकी मात्रा, उसमें मिलाई जाने वाली चीनी और व्यक्ति की सेहत पर निर्भर करते हैं। आइए जानते हैं कॉफी पीने के पांच संभावित फायदे।
कॉफी में मौजूद कैफीन केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को उत्तेजित करता है। इससे नींद और थकान का एहसास कुछ समय के लिए कम हो सकता है। कैफीन मस्तिष्क में एडेनोसिन नामक रसायन के रिसेप्टर्स को अवरुद्ध करता है, जो सामान्य रूप से शरीर में सुस्ती और नींद का एहसास बढ़ाने में भूमिका निभाता है।
इसका असर यह होता है कि व्यक्ति कुछ समय तक अधिक सतर्क और सक्रिय महसूस कर सकता है। कुछ अध्ययनों में कैफीन के सेवन को शारीरिक गतिविधियों के दौरान थकान कम महसूस होने से भी जोड़ा गया है।
हालांकि, कॉफी नींद की कमी का विकल्प नहीं है। अधिक मात्रा में इसका सेवन करने से बेचैनी, घबराहट और नींद में परेशानी हो सकती है।
कुछ शोधों में नियमित कॉफी पीने और टाइप-2 डायबिटीज के कम जोखिम के बीच संबंध पाया गया है। एक समीक्षा में शामिल 30 अध्ययनों के विश्लेषण के अनुसार, प्रतिदिन कॉफी के प्रत्येक अतिरिक्त कप के साथ टाइप-2 डायबिटीज का जोखिम लगभग 6 प्रतिशत कम होने से जुड़ा पाया गया।
शोधकर्ताओं के मुताबिक, कॉफी में मौजूद कुछ जैविक यौगिक शरीर में ग्लूकोज के चयापचय और इंसुलिन से संबंधित प्रक्रियाओं पर प्रभाव डाल सकते हैं। कॉफी में एंटीऑक्सीडेंट भी पाए जाते हैं, जो कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाने वाले ऑक्सीडेटिव तनाव से बचाव में भूमिका निभा सकते हैं।
हालांकि, इस संबंध का अर्थ यह नहीं है कि कॉफी पीने से डायबिटीज से बचाव की गारंटी मिलती है। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और वजन पर नियंत्रण भी महत्वपूर्ण हैं।
कुछ अध्ययनों में कॉफी के सेवन को पार्किंसंस और अल्जाइमर जैसी न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों के कम जोखिम से जोड़ा गया है। इन बीमारियों में मस्तिष्क की कोशिकाएं प्रभावित होती हैं, जिससे याददाश्त, सोचने-समझने और शरीर की गतिविधियों पर असर पड़ सकता है।
शोध के अनुसार, कॉफी में मौजूद कैफीन और अन्य जैविक यौगिक मस्तिष्क के कामकाज पर प्रभाव डाल सकते हैं। नियमित रूप से सीमित मात्रा में कॉफी पीने वालों में पार्किंसंस रोग का जोखिम कम पाए जाने के संकेत मिले हैं। हालांकि, यह अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है कि कॉफी सीधे तौर पर इन बीमारियों से बचाव करती है या इसके पीछे दूसरे कारक भी जिम्मेदार हैं
वजन नियंत्रित रखने की कोशिश कर रहे लोगों के लिए भी कॉफी उपयोगी हो सकती है। कैफीन कुछ समय के लिए शरीर की ऊर्जा खर्च करने की प्रक्रिया और शारीरिक सक्रियता को प्रभावित कर सकता है। कुछ अध्ययनों में कॉफी के सेवन और शरीर में वसा की कम मात्रा के बीच संबंध पाया गया है।
हालांकि, केवल कॉफी पीने से वजन कम होने की गारंटी नहीं है। वजन घटाने के लिए संतुलित भोजन, नियमित शारीरिक गतिविधि और पर्याप्त नींद जरूरी हैं।
कॉफी पीते समय उसमें मिलाई जाने वाली चीनी, क्रीम और फ्लेवर्ड सिरप की मात्रा पर भी ध्यान देना चाहिए। इन चीजों की अधिकता से पेय में कैलोरी बढ़ सकती है और वजन नियंत्रित करना मुश्किल हो सकता है।
कुछ शोधों में कॉफी पीने और अवसाद के कम जोखिम के बीच संबंध सामने आया है। कैफीन सतर्कता बढ़ाने के साथ-साथ कुछ समय के लिए मूड और मानसिक सक्रियता को भी प्रभावित कर सकता है।
मेयो क्लिनिक के अनुसार, कैफीन वाली कॉफी का सेवन कुछ समूहों में बेहतर मूड और अवसाद के कम जोखिम से जुड़ा पाया गया है। हालांकि, इस संबंध को समझने के लिए अभी और शोध की जरूरत है। कॉफी को अवसाद का इलाज नहीं माना जाना चाहिए। यदि किसी व्यक्ति को लंबे समय तक उदासी, निराशा या अन्य मानसिक परेशानियां बनी रहती हैं, तो उसे विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए
कॉफी का सेवन सीमित मात्रा में करना जरूरी है। अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के अनुसार, अधिकांश स्वस्थ वयस्कों के लिए प्रतिदिन 400 मिलीग्राम तक कैफीन आम तौर पर नकारात्मक प्रभावों से जुड़ा नहीं पाया गया है। हालांकि, कॉफी के कप का आकार, बनाने का तरीका और उसमें मौजूद कैफीन की मात्रा अलग-अलग हो सकती है।
निष्कर्ष: कॉफी संतुलित आहार का हिस्सा हो सकती है और ऊर्जा, एकाग्रता तथा कुछ दीर्घकालिक स्वास्थ्य जोखिमों के संदर्भ में संभावित लाभ प्रदान कर सकती है। लेकिन इसे किसी बीमारी से बचाव या उपचार का निश्चित उपाय नहीं समझना चाहिए। सही मात्रा और स्वस्थ जीवनशैली के साथ इसका सेवन करना अधिक महत्वपूर्ण है।