जलवायु संकट से निपटने में एआई और अक्षय ऊर्जा की भूमिका पर चर्चा

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 22-09-2026
Discussion on the role of AI and renewable energy in dealing with climate crisis
Discussion on the role of AI and renewable energy in dealing with climate crisis

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली

 
वैज्ञानिकों के पृथ्वी के लगातार बिगड़ते स्वास्थ्य का आकलन करने के बीच दुनिया भर के नेताओं ने सोमवार को इसे जल्द सुधारने के उपायों पर एक सप्ताह तक चलने वाली वार्ता की शुरुआत की और इस दौरान अक्षय ऊर्जा के तेजी से विस्तार को उम्मीद की किरण के रूप में देखा गया।
 
वार्ता में इस बात पर भी चर्चा होगी कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और उसके लिए बड़ी मात्रा में बिजली एवं पानी की खपत करने वाले डेटा केंद्रों का बढ़ता विस्तार जलवायु संकट को बढ़ाने के साथ-साथ उसके समाधान में भी मदद कर सकता है।
 
हर साल संयुक्त राष्ट्र महासभा और न्यूयॉर्क जलवायु सप्ताह के दौरान वैश्विक तापमान वृद्धि पर चर्चा होती है, लेकिन कार्रवाई अपेक्षाकृत कम होती है।
 
विशेषज्ञों और कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस बार एआई और डेटा केंद्रों का बढ़ता प्रभाव तथा ईरान और यूक्रेन में युद्धों के कारण जीवाश्म ईंधन की बढ़ती कीमतें चर्चा का रुख बदल सकती हैं। इसके अलावा, एशिया में जलवायु परिवर्तन से जुड़ी आपदाएं भी अधिक विनाशकारी होती जा रही हैं।
 
जर्मनी के ‘पॉट्सडैम इंस्टीट्यूट फॉर क्लाइमेट इम्पैक्ट रिसर्च’ के निदेशक जोहान रॉकस्ट्रॉम ने कहा, ‘‘पृथ्वी का स्वास्थ्य ठीक नहीं है।’’
 
उन्होंने चेतावनी दी कि मानव गतिविधियां पृथ्वी की स्थिरता, लचीलेपन और जीवन-समर्थन प्रणालियों को जोखिम में डाल रही हैं।
 
संस्थान की ‘प्लैनटरी बाउंड्रीज साइंस लैब’ की नई रिपोर्ट के अनुसार, स्वस्थ पृथ्वी के लिए निर्धारित नौ में से सात ‘प्लैनेटरी बाउंड्रीज’ (पृथ्वी की सुरक्षित पर्यावरणीय सीमाएं) पार हो चुकी हैं।
 
ब्रिटेन के विदेश मंत्री एड मिलिबैंड ने स्वच्छ और अक्षय ऊर्जा की ओर बदलाव को ‘‘राष्ट्रीय सुरक्षा की अनिवार्यता’’ बताया।
 
संयुक्त राष्ट्र के जलवायु प्रमुख साइमन स्टील ने कहा कि जलवायु परिवर्तन खाद्य कीमतों और महंगाई को बढ़ा रहा है तथा जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता दुनिया भर में अरबों लोगों को प्रभावित कर रही है।