Court discharges Kala Jatheri in attempt to murder case connected with firing on police team
नई दिल्ली
द्वारका ज़िला अदालत ने हाल ही में हत्या की कोशिश के एक मामले में आरोपी संदीप उर्फ़ काला जठेड़ी को बरी कर दिया है। यह मामला कथित तौर पर दो सह-आरोपियों द्वारा पुलिस टीम पर की गई गोलीबारी से जुड़ा है। अदालत ने अन्य 4 आरोपियों के ख़िलाफ़ हत्या की कोशिश, पुलिस पर हमला और आर्म्स एक्ट समेत अलग-अलग अपराधों के लिए आरोप तय किए। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने विक्की और नरेंद्र की गिरफ़्तारी के बाद 2023 में मामला दर्ज किया था। जांच के दौरान अन्य आरोपियों को गिरफ़्तार किया गया। यह घटना 5 अगस्त, 2023 को बामनोली इलाके में हुई थी।
एडिशनल सेशंस जज (ASJ) रविंदर सिंह ने संदीप उर्फ़ काला जठेड़ी को यह देखते हुए बरी कर दिया कि अन्य आरोपियों के बयान के अलावा कोई स्वतंत्र सबूत नहीं है। ASJ रविंदर सिंह ने 30 सितंबर को आदेश दिया, "ज़ाहिर है, सह-आरोपियों के केवल बयानों से - बिना किसी बरामदगी या स्वतंत्र पुष्टि के - आरोपी संदीप उर्फ़ काला उर्फ़ काला जठेड़ी के ख़िलाफ़ कोई प्रथम दृष्टया मामला नहीं बनता है, जो उस पर आरोप तय करने के लिए ज़रूरी है। इसलिए, आरोपी संदीप को इस मामले में लगाए गए आरोपों से बरी किया जाना चाहिए।" हालांकि, अदालत ने 4 अन्य आरोपियों के ख़िलाफ़ आरोप तय किए, यह कहते हुए कि उनके ख़िलाफ़ आरोप तय करने के लिए पर्याप्त सामग्री मौजूद है। अदालत ने आरोपी विक्की उर्फ़ वीरा उर्फ़ मोटा और नरेंद्र उर्फ़ बंटा के ख़िलाफ़ IPC की धारा 186, 353, 307, 34 और आर्म्स एक्ट की धारा 25/27 के तहत अपराधों के लिए आरोप तय किए।
आरोपी मनप्रीत गोलू के ख़िलाफ़ आर्म्स एक्ट की धारा 25 के तहत अपराधों के लिए आरोप तय किए गए हैं। अदालत ने आरोपी कृष्ण के ख़िलाफ़ केवल आर्म्स एक्ट की धारा 25 के तहत अपराध के लिए आरोप तय किए हैं। वकील सात्विक ने आरोपी संदीप, विक्की और नरेंद्र का पक्ष रखा। उन्होंने आरोपियों के लिए बरी करने की अर्ज़ी दाखिल की थी। अर्ज़ी पर विचार करने के बाद, अदालत ने संदीप उर्फ़ काला जठेड़ी को बरी कर दिया। काला जठेड़ी को बरी करते हुए कोर्ट ने कहा कि जहाँ तक आरोपी संदीप उर्फ काला जठेड़ी का सवाल है, इस मामले में उसे फँसाने का आधार सिर्फ़ उसके साथ के आरोपियों के बयान हैं, जिनमें कहा गया है कि वह गैंग का लीडर था और उसने ही उन्हें घटना को अंजाम देने के लिए कहा था।
ASJ सिंह ने कहा, "इस मामले में उसके पास से कोई हथियार या गोला-बारूद बरामद नहीं हुआ है। साथ ही, घटना वाली जगह पर उसकी कोई सीधी भूमिका भी सामने नहीं आई है। इसके अलावा, उसे इस घटना या अपराध की किसी साज़िश से जोड़ने के लिए कोई स्वतंत्र गवाह, इलेक्ट्रॉनिक सबूत, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, इंटरसेप्ट की गई बातचीत या कोई अन्य मान्य सबूत रिकॉर्ड पर नहीं लाया गया है।" अभियोजन पक्ष का कहना था कि रात करीब 12:25 बजे, मोटरसाइकिल पर सवार दो लोगों को बैरिकेडिंग पॉइंट की ओर आते देखा गया और रुकने का इशारा करने पर वे भागने की कोशिश करने लगे, जिसके बाद उन्हें रोक लिया गया।
आरोप था कि मोटरसाइकिल पर पीछे बैठे व्यक्ति ने SI सचिन गुलिया को जान से मारने की नीयत से गोली चलाई और SI सचिन गुलिया ने आत्मरक्षा में जवाबी गोली चलाई। उस व्यक्ति ने कॉन्स्टेबल धीरज पर भी गोली चलाने की कोशिश की, लेकिन उसकी पिस्तौल से गोली नहीं चली (मिसफायर हो गई), जिसके बाद कॉन्स्टेबल धीरज ने आत्मरक्षा में एक राउंड गोली चलाई। उन लोगों को मौके पर ही पकड़ लिया गया और उनकी पहचान विक्की उर्फ वीरा उर्फ मोटा और नरेंद्र उर्फ बंटा के तौर पर हुई; उनके पास से दो पिस्तौल और ज़िंदा कारतूस बरामद होने का दावा किया गया।