नई दिल्ली
सोमवार के ट्रेडिंग सेशन की शुरुआत में टाटा ग्रुप के ज़्यादातर शेयरों पर दबाव बना रहा। इसकी वजह टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस के बीच ग्रुप की लीडरशिप और भविष्य के स्ट्रक्चर को लेकर बढ़ा विवाद था। इन्वेस्टर्स कानूनी कार्रवाई की संभावना और टाटा संस की प्रस्तावित लिस्टिंग को लेकर फिर से बनी अनिश्चितता पर बारीकी से नज़र रखे हुए थे।
12:24 IST तक, टाटा कैपिटल का शेयर लगभग 3% गिरकर ₹341 पर आ गया, जबकि टाटा पावर 2.5% गिरकर ₹365.55 पर आ गया। टाटा इन्वेस्टमेंट कॉर्पोरेशन 2.3% गिरकर ₹685.90 पर और टाटा टेक्नोलॉजीज़ 2.2% गिरकर ₹707 पर आ गया। टाटा एलेक्सी 2% गिरकर ₹3,268 पर आ गया और इसने 52-हफ़्ते का नया निचला स्तर छुआ। टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स का शेयर लगभग 1% गिरकर ₹301 पर था, जबकि टाटा मोटर्स कमर्शियल व्हीकल्स में 1% की गिरावट आई। टाटा कम्युनिकेशंस 1.5% गिरकर ₹1,746.80 पर और टाटा टेलीसर्विसेज 1.4% गिरकर ₹35.25 पर आ गया। नेगेटिव सेंटीमेंट के बावजूद, निफ्टी 50 की प्रमुख कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) हरे निशान में ट्रेड कर रही थी और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज पर लगभग 1% बढ़कर ₹2,122.50 पर थी।
इसकी तुरंत वजह टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति को लेकर हुआ विवाद है। टाटा संस बोर्ड ने 17 सितंबर को 4:1 के वोट से चंद्रशेखरन के लिए पांच साल के नए कार्यकाल को मंज़ूरी दी थी। टाटा ट्रस्ट्स ने रविवार को एक बयान में कहा कि दो डायरेक्टरों में से एक ने चंद्रशेखरन को दोबारा नियुक्त करने के प्रस्ताव के खिलाफ वोट दिया था। लेकिन ट्रस्ट्स का आरोप है कि इसके बावजूद, टाटा संस बोर्ड ने कास्टिंग वोट के आधार पर उन्हें अगले पांच साल के लिए दोबारा नियुक्त करने का फ़ैसला लागू किया।
टाटा ट्रस्ट्स, जिसके पास टाटा संस की लगभग 66% हिस्सेदारी है, ने इस फ़ैसले की वैधता को चुनौती दी है। उसका तर्क है कि टाटा संस के 'आर्टिकल्स ऑफ़ एसोसिएशन' के तहत ट्रस्ट द्वारा नॉमिनेट किए गए डायरेक्टरों में से बहुमत का समर्थन ज़रूरी है। चूंकि इसके दो नॉमिनी में से एक ने प्रस्ताव के खिलाफ वोट दिया था, इसलिए ट्रस्ट का कहना है कि ज़रूरी शर्त पूरी नहीं हुई और चेयरमैन का कास्टिंग वोट इसे ओवरराइड नहीं कर सकता।
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब टाटा संस पर संभावित लिस्टिंग को लेकर फिर से दबाव बढ़ गया है। ऐसा रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया द्वारा प्राइवेट कंपनी के तौर पर काम जारी रखने के लिए रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने की उसकी रिक्वेस्ट को ठुकराए जाने के बाद हुआ है। इससे ग्रुप की होल्डिंग कंपनी की भविष्य की ओनरशिप और स्ट्रक्चर पर फिर से ध्यान केंद्रित हुआ है।
इन घटनाक्रमों से उम्मीद है कि टाटा ग्रुप के शेयर लीडरशिप विवाद, गवर्नेंस व्यवस्था और टाटा संस की लिस्टिंग योजनाओं पर होने वाली आगे की घोषणाओं के प्रति संवेदनशील बने रहेंगे।