Feroz Khan: When Bollywood brought 'cool' vibes, western style and the magic of disco
अर्सला खान/नई दिल्ली
हिंदी सिनेमा में कुछ कलाकार ऐसे रहे हैं, जिन्होंने सिर्फ अभिनय नहीं किया, बल्कि फिल्मों को देखने का अंदाज़ ही बदल दिया। फ़िरोज़ खान उन्हीं नामों में शामिल हैं। अभिनेता, निर्माता और निर्देशक के तौर पर उन्होंने बॉलीवुड में ऐसा स्टाइल पेश किया, जिसमें वेस्टर्न लुक, तेज रफ्तार गाड़ियां, ग्लैमर, विदेशी लोकेशन, स्टाइलिश एक्शन और मॉडर्न संगीत एक साथ दिखाई देता था।
उनके सिनेमा में हॉलीवुड और वेस्टर्न फिल्मों की झलक जरूर थी, लेकिन उन्होंने उसे भारतीय दर्शकों के हिसाब से ढालने की कोशिश की। उनकी पहली निर्देशित फिल्म ‘अपराध’ (1972) में जर्मनी के ऑटो रेसिंग ट्रैक पर शूटिंग जैसे प्रयोग देखने को मिले।
इसके बाद ‘धर्मात्मा’ (1975) में उन्होंने The Godfather से प्रेरित कहानी को भारतीय परिवेश में पेश किया। लेकिन फ़िरोज़ खान के करियर में वह फिल्म आई जिसने उनके नाम को स्टाइल, ग्लैमर और मॉडर्न बॉलीवुड का पर्याय बना दिया ‘कुर्बानी’ (1980)।
‘कुर्बानी’ और बॉलीवुड का नया अंदाज़
‘कुर्बानी’ में फ़िरोज़ खान, विनोद खन्ना और ज़ीनत अमान जैसे सितारे थे। फिल्म की कहानी में दोस्ती, प्यार, अपराध और बलिदान था, लेकिन इसकी सबसे बड़ी खासियत थी इसका प्रेजेंटेशन।
फिल्म में लंदन की लोकेशन, तेज रफ्तार एक्शन, स्टाइलिश कपड़े, शानदार गाड़ियां और ग्लैमरस विजुअल्स ने उस दौर के हिंदी सिनेमा को एक अलग पहचान दी। 2026 में ThePrint ने भी ‘कुर्बानी’ को उस दौर की ऐसी फिल्म के तौर पर याद किया, जिसने बॉलीवुड को एक अलग तरह का “global style” दिया और फिर आया संगीत... ‘आप जैसा कोई’ ने बदल दिया संगीत का मूड “आप जैसा कोई मेरी ज़िंदगी में आए, तो बात बन जाए...”
आज यह गाना सुनना सामान्य बात लग सकती है, लेकिन 1980 के आसपास इसका साउंड काफी अलग था। इसे नाज़िया हसन ने गाया और संगीत बिद्दू ने तैयार किया था। गाना ‘कुर्बानी’ के साउंडट्रैक का हिस्सा था और ज़ीनत अमान पर फिल्माया गया।
इसे अक्सर भारतीय पॉप/डिस्को संगीत में एक बेहद महत्वपूर्ण मोड़ के तौर पर याद किया जाता है। हालांकि इसे शाब्दिक रूप से “भारत का पहला पॉप गाना” कहना सही नहीं होगा, क्योंकि इससे पहले भी भारतीय लोकप्रिय संगीत में आधुनिक और पॉप प्रभाव मौजूद थे। लेकिन ‘आप जैसा कोई’ ने जिस तरह डिस्को बीट, पश्चिमी प्रोडक्शन और हिंदी फिल्म संगीत को एक साथ लोकप्रिय बनाया, उसका प्रभाव बहुत बड़ा था। ‘कुर्बानी’ का साउंडट्रैक 1980 में बेहद सफल रहा और फिल्म के संगीत ने भारतीय उपमहाद्वीप में डिस्को के बढ़ते प्रभाव को और तेज किया।
सबसे दिलचस्प किस्सा: 15 साल की नाज़िया हसन
‘आप जैसा कोई’ की कहानी सिर्फ एक गाने की कहानी नहीं है, बल्कि एक युवा आवाज की खोज की कहानी भी है।
नाज़िया हसन उस समय महज 15 साल की थीं। लंदन में रहने वाली नाज़िया की मुलाकात अभिनेत्री ज़ीनत अमान से हुई। ज़ीनत ने उनकी आवाज सुनी और बाद में उन्हें फ़िरोज़ खान से मिलवाया। फ़िरोज़ उनकी आवाज से प्रभावित हुए और फिर नाज़िया को बिद्दू के पास ऑडिशन के लिए भेजा गया।
ज़ीनत अमान ने वर्षों बाद इस किस्से को याद करते हुए बताया था कि उन्हें नाज़िया की आवाज में कुछ खास लगा था। उनके मुताबिक, बाद में फ़िरोज़ खान भी नाज़िया की आवाज से प्रभावित हुए और इसी मुलाकात ने ‘आप जैसा कोई’ का रास्ता खोला।
एक और दिलचस्प मोड़
बिद्दू शुरुआत में हिंदी फिल्म के लिए गाना बनाने को लेकर बहुत उत्साहित नहीं थे। लेकिन फ़िरोज़ खान ने उन्हें मनाया। दोनों का संबंध बेंगलुरु से था और फ़िरोज़ ने इसी जुड़ाव का भी इस्तेमाल उन्हें मनाने में किया। बिद्दू ने बाद में इस मुलाकात को याद करते हुए बताया कि फ़िरोज़ खान काफी persuasive थे। यानी अगर फ़िरोज़ खान उस समय बिद्दू पर भरोसा नहीं करते, तो शायद ‘आप जैसा कोई’ का इतिहास भी कुछ और होता।
जब ‘कॉपी’ गाने से बनी बात
इस कहानी का एक और रोचक पहलू है। उपलब्ध विवरणों के मुताबिक शुरुआत में बिद्दू ने एक मौजूदा विदेशी गाने की हिंदी प्रस्तुति रिकॉर्ड करने की कोशिश की थी। लेकिन नाज़िया और उनके भाई ज़ोहेब कथित तौर पर किसी कॉपी किए हुए गाने को गाने के पक्ष में नहीं थे और वे एक ओरिजिनल गाना चाहते थे। इसके बाद ‘आप जैसा कोई’ की दिशा बनी। यही वह फैसला था जिसने आगे चलकर नाज़िया हसन को दक्षिण एशिया की पॉप सनसनी बना दिया।
24-ट्रैक रिकॉर्डिंग का प्रयोग
‘आप जैसा कोई’ की रिकॉर्डिंग भी अपने समय के हिसाब से बेहद आधुनिक थी। उपलब्ध स्रोतों के अनुसार इसे लंदन में रिकॉर्ड किया गया और 24-ट्रैक तकनीक का इस्तेमाल किया गया, जबकि उस दौर में भारतीय फिल्म संगीत की रिकॉर्डिंग तकनीक इससे काफी सीमित थी। नाज़िया की आवाज पर echo effect का इस्तेमाल भी किया गया। यानी फ़िरोज़ खान सिर्फ पर्दे पर मॉडर्न दिखने वाली फिल्म नहीं बना रहे थे, बल्कि फिल्म की आवाज को भी मॉडर्न बना रहे थे।
‘कुर्बानी’ में सिर्फ ‘आप जैसा कोई’ ही नहीं था
फिल्म के बाकी संगीत की जिम्मेदारी कल्याणजी-आनंदजी के पास थी। फिल्म में ‘लैला ओ लैला’, ‘क्या देखते हो’ और ‘कुर्बानी कुर्बानी’ जैसे गाने भी बेहद लोकप्रिय हुए। ‘आप जैसा कोई’ को बिद्दू ने तैयार किया था, जबकि बाकी प्रमुख गानों और बैकग्राउंड स्कोर का संगीत कल्याणजी-आनंदजी ने दिया।
दिलचस्प बात यह है कि बिद्दू को फिल्म के लिए एक गाना देने का फैसला हर किसी को पसंद नहीं आया था। कुछ संगीतकारों को एक बाहरी संगीतकार को शामिल किए जाने पर आपत्ति थी, लेकिन फ़िरोज़ खान अपने फैसले पर कायम रहे।
फ़िरोज़ खान का ‘वेस्टर्न’ अंदाज़ कहां से आया?
फ़िरोज़ खान की फिल्मों में cowboy look, fast cars, glamorous women और dramatic music बार-बार दिखाई देते थे। ‘अपराध’ से लेकर ‘धर्मात्मा’ और फिर ‘कुर्बानी’ तक उनकी फिल्मों में विदेशी लोकेशन और पश्चिमी सिनेमा के प्रभाव को भारतीय कहानी के साथ मिलाने की कोशिश दिखाई देती है।
‘धर्मात्मा’ में अफगानिस्तान की लोकेशन का इस्तेमाल भी उस समय के लिहाज से बड़ा प्रयोग था। फिल्म को The Godfather से प्रेरित बताया जाता है, लेकिन कहानी और किरदारों को भारतीय संदर्भ में ढाला गया था।
‘कुर्बानी’ की सफलता के बाद बदला पूरा माहौल
‘कुर्बानी’ के बाद डिस्को और वेस्टर्न म्यूजिक का प्रभाव हिंदी फिल्मों में और ज्यादा दिखाई देने लगा। नाज़िया हसन और बिद्दू की जोड़ी की सफलता ने आगे चलकर ‘Disco Deewane’ जैसे पॉप एल्बम का रास्ता भी खोला। 1981 में आया यह एल्बम दक्षिण एशिया के साथ दूसरे बाजारों में भी लोकप्रिय हुआ। इस तरह एक फिल्म के लिए बनाया गया प्रयोग सिर्फ फिल्म तक सीमित नहीं रहा उसने फिल्म संगीत और पॉप कल्चर दोनों को प्रभावित किया।
फ़िरोज़ खान की सबसे बड़ी खासियत
फ़िरोज़ खान की खासियत शायद यही थी कि वह समय से पहले “presentation” की ताकत समझते थे। कहानी भारतीय हो सकती थी, कलाकार भारतीय हो सकते थे और संगीत में हिंदी-उर्दू के शब्द हो सकते थे, लेकिन पर्दे पर उन्हें पेश करने का अंदाज़ अंतरराष्ट्रीय हो सकता था। तेज कारें, स्टाइलिश कपड़े, विदेशी लोकेशन, ग्लैमर, एक्शन और मॉडर्न बीट्स—ये सब फ़िरोज़ खान के सिनेमा की पहचान बन गए और ‘कुर्बानी’ इसका सबसे चमकदार उदाहरण बनी।
आज जब बॉलीवुड में इंटरनेशनल लोकेशन, फ्यूजन म्यूजिक और ग्लोबल विजुअल्स आम बात हैं, तब पीछे मुड़कर देखें तो फ़िरोज़ खान की फिल्मों में दिखाई देने वाला वह अंदाज़ कई मायनों में अपने समय से आगे नजर आता है। ‘आप जैसा कोई’ की धुन बजते ही आज भी वही डिस्को दौर याद आता है एक ऐसा दौर, जब एक 15 साल की लड़की की आवाज, एक जिद्दी फिल्ममेकर का विजन और एक विदेशी अंदाज़ का संगीत मिलकर इतिहास बना रहे थे।