बच्चों की तस्करी एक गंभीर समस्या है—उन्हें जबरन मजदूरी, भीख मंगवाने, घरेलू काम और यौन शोषण जैसे अपराधों में धकेला जाता है।
गरीबी और बेरोजगारी बड़ा कारण हैं। परिवार की आर्थिक मजबूरी बच्चों को शोषण के प्रति ज्यादा असुरक्षित बनाती है।
बाल घरेलू मजदूरी भी जोखिम बढ़ाती है। कई मामलों में बच्चों को काम के नाम पर रखा जाता है, लेकिन वे शोषण और हिंसा का शिकार हो जाते हैं।
भीख मंगवाने वाले गिरोह भी बच्चों का इस्तेमाल करते हैं। कुछ मामलों में बच्चों को जबरन भीख मांगने के लिए मजबूर किया जाता है।
प्रवासी और विस्थापित बच्चे ज्यादा vulnerable हैं। परिवार से बिछड़ना और सुरक्षित सेवाओं की कमी trafficking का खतरा बढ़ाती है।
असल आंकड़ा इससे ज्यादा हो सकता है, क्योंकि कई मामले रिपोर्ट ही नहीं होते या दूसरे अपराधों के तहत दर्ज किए जाते हैं।
2024 में उपलब्ध आधिकारिक प्रांतीय आंकड़ों में 11,139 child-trafficking-related cases दर्ज हुए, लेकिन रिपोर्ट खुद बताती है कि यह पूरे पैमाने को नहीं दर्शाता।
ऑनलाइन शोषण भी नया खतरा है। UNICEF की 2026 रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान में 12–17 वर्ष के इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले करीब 15 लाख बच्चों ने एक साल में किसी न किसी तरह के technology-facilitated sexual exploitation/abuse का अनुभव किया।