आशूरा इस्लामी कैलेंडर के पहले महीने मुहर्रम की 10वीं तारीख को मनाया जाता है।
यह दिन इस्लाम के इतिहास में बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है और इसके साथ कई धार्मिक घटनाएं जुड़ी हुई हैं।
इस्लामी परंपराओं के अनुसार, इसी दिन Prophet Musa और उनकी कौम को फिरऔन के अत्याचारों से मुक्ति मिली थी।
कहा जाता है कि अल्लाह के आदेश से समुद्र का रास्ता खुल गया और मूसा अपने अनुयायियों के साथ सुरक्षित पार निकल गए, जबकि फिरऔन और उसकी सेना डूब गई।
इसी घटना की याद में Prophet Muhammad ने इस दिन रोज़ा रखने की सलाह दी थी।
हालांकि आशूरा की सबसे प्रसिद्ध ऐतिहासिक घटना वर्ष 680 ईस्वी में हुई Battle of Karbala से जुड़ी है।
इराक के करबला में Imam Husayn ibn Ali और उनके साथियों ने अन्याय और अत्याचार के खिलाफ संघर्ष करते हुए शहादत दी थी।
इमाम हुसैन पैगंबर मुहम्मद के नवासे थे और उनकी कुर्बानी को सत्य, न्याय और इंसाफ के लिए सर्वोच्च बलिदान माना जाता है।
इसी कारण शिया मुसलमान आशूरा के दिन विशेष रूप से इमाम हुसैन की शहादत को याद करते हैं। मजलिस, जुलूस और शोक सभाओं का आयोजन किया जाता है।
वहीं सुन्नी मुसलमान इस दिन रोज़ा रखने और इबादत करने को पुण्य का कार्य मानते हैं।