बहुत छोटी उम्र से मंच पर — नूरजहां ने बचपन में ही अभिनय और गायन की दुनिया में कदम रख दिया था। उनकी प्रतिभा इतनी कम उम्र में सामने आ गई थी कि जल्द ही उन्हें बाल कलाकार के तौर पर पहचान मिलने लगी।

“मलिका-ए-तरन्नुम” का खिताब — उनकी गायकी ने उन्हें इतना लोकप्रिय बनाया कि उन्हें “मलिका-ए-तरन्नुम” कहा जाने लगा।

फिल्मों में भी बनाई पहचान — नूरजहां सिर्फ गायिका नहीं थीं; उन्होंने फिल्मों में अभिनय भी किया और कई फिल्मों में अपनी आवाज भी दी।

खानदान’ ने बदली जिंदगी — 1942 की फिल्म खानदान नूरजहां के करियर का महत्वपूर्ण पड़ाव बनी। इसके बाद उनकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी।

भारत से पाकिस्तान तक का सफर — 1947 के बंटवारे के बाद नूरजहां पाकिस्तान चली गईं। वहां उन्होंने गायिका और अभिनेत्री के रूप में अपना करियर जारी रखा।

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