राष्ट्रपति भवन में भी सादगी: राष्ट्रपति बनने के बाद भी डॉ. कलाम सादा जीवन जीते थे। उनके पास निजी सुख-सुविधाओं का बड़ा संग्रह नहीं था।
2. परिवार को नहीं दिया सरकारी खर्च का लाभ: बताया जाता है कि उन्होंने अपने परिवार के राष्ट्रपति भवन में रहने और खाने-पीने से जुड़े खर्चों का भुगतान निजी पैसे से करने पर जोर दिया था।
3. बचपन में अखबार बांटते थे: रामेश्वरम में बचपन के दौरान उन्होंने परिवार की मदद के लिए अखबार बांटने का काम किया था।
4. असफलता को बनाया सफलता की सीढ़ी: भारतीय वायुसेना में पायलट बनने का उनका सपना पूरा नहीं हुआ। बाद में उन्होंने वैज्ञानिक के रूप में देश की मिसाइल और अंतरिक्ष परियोजनाओं में अहम योगदान दिया।
5. बच्चों से था खास लगाव: डॉ. कलाम विद्यार्थियों से मिलना और उन्हें बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित करना बेहद पसंद करते थे।
6. किताबें थीं उनकी सबसे बड़ी संपत्ति: उनके निधन के समय सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, उनके पास लगभग 2,500 किताबें और कुछ बेहद साधारण निजी सामान थे।
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