शब-ए-बारात इस्लाम की एक मुक़द्दस और बरकत वाली रात मानी जाती है।
यह शाबान महीने की 15वीं रात को आती है।
‘शब’ का मतलब रात और ‘बारात’ का अर्थ है बख़्शिश, निजात और गुनाहों से माफ़ी।
इस रात को इबादत, दुआ, तौबा और इस्तेग़फार की रात कहा जाता है।
माना जाता है कि इस रात अल्लाह अपने बंदों की दुआएं क़ुबूल करता है।
माना जाता है कि इस रात अल्लाह अपने बंदों की दुआएं क़ुबूल करता है।
माना जाता है कि इस रात अल्लाह अपने बंदों की दुआएं क़ुबूल करता है।
शब-ए-बारात को रहमत, मग़फिरत और निजात की रात के तौर पर देखा जाता है।