1906 – कोलकाता झंडा: शुरुआती चेतना का प्रतीक

1921 – पिंगली वेंकैया का झंडा: धार्मिक समरसता और स्वदेशी का प्रतीक

1931 – तिरंगे को मिली अस्थायी स्वीकृति: धर्मनिरपेक्ष और राजनीतिक परिपक्वता की ओर :

1947 – स्वतंत्र भारत का तिरंगा: संविधानिक और वैश्विक दृष्टिकोण के साथ

1906 से 1947 तक भारतीय ध्वज का हर बदलाव एक ऐतिहासिक संदर्भ, राजनीतिक जरूरत, और सांस्कृतिक चेतना से प्रेरित था। झंडा केवल कपड़ा नहीं, बल्कि भारत के आत्मबोध, संघर्ष, एकता और न्याय की यात्रा का जीवंत प्रतीक है।

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