रमज़ान का महीना रहमत, बरकत और मग़फ़िरत का महीना माना जाता है।
इस पाक महीने में किया गया हर नेक अमल कई गुना बढ़ा दिया जाता है, इसलिए लोग खास वज़ीफ़े और दुआओं का एहतमाम करते हैं।
रमज़ान में सबसे बेहतरीन वज़ीफ़ा कुरआन की तिलावत है, क्योंकि इसी महीने में कुरआन नाज़िल हुआ।
रोज़ाना कुछ वक्त निकालकर तिलावत करना, उसके मायने समझना और उस पर अमल की कोशिश करना सबसे अफ़ज़ल अमल माना गया है।
इसके साथ “सुब्हानअल्लाह, अल्हम्दुलिल्लाह, अल्लाहु अकबर” और “ला इलाहा इल्लल्लाह” का ज़िक्र बार-बार करना बहुत सवाब का काम है।
रमज़ान के आख़िरी अशरे में “अल्लाहुम्मा इन्नका अफ़ुव्वुन तुहिब्बुल अफ़्व फ़अफ़ु अन्नी” पढ़ना खास तौर पर बताया गया है।
यह दुआ मग़फ़िरत के लिए बेहद अहम मानी जाती है।
दरूद शरीफ़ का एहतमाम भी रमज़ान में बड़ा असर रखता है।
दिन में कम से कम 100 बार दरूद शरीफ़ पढ़ना दिल को सुकून देता है और रहमत के दरवाज़े खोलता है।