सत्य और ईमानदारी
उन्होंने कहा कि एक सच्चा मुसलमान वह है जो झूठ न बोले और हमेशा ईमानदारी से काम करे।
दूसरों के साथ अच्छा व्यवहार
‘‘तुममें सबसे अच्छा वह है जो अपने पड़ोसियों और परिवारवालों के साथ अच्छा व्यवहार करे।’’
ज्ञान का महत्व
‘‘ज्ञान प्राप्त करो, चाहे वह चीन तक क्यों न जाना पड़े।’’
शिक्षा को उन्होंने हर मुसलमान (औरत व मर्द) के लिए ज़रूरी बताया।
दयालुता और करुणा
उन्होंने कहा कि किसी भूखे को खाना खिलाना और बीमार की सेवा करना अल्लाह की इबादत के बराबर है।
सबको बराबर मानना
पैगंबर ने सिखाया कि न कोई अरब गैर-अरब से बड़ा है और न कोई गोरा काले से – श्रेष्ठता केवल तक़वा (अच्छे कर्म) से है।
माफी और धैर्य
दुश्मनों तक को माफ़ कर देना और धैर्य रखना उनकी सबसे बड़ी विशेषता थी।
महिलाओं का सम्मान
‘‘तुममें सबसे अच्छे वे हैं जो अपनी स्त्रियों के साथ अच्छा व्यवहार करते हैं।’’
सफाई का महत्व
‘‘पाकीज़गी आधा ईमान है।’’ यानी स्वच्छता को आध्यात्मिक और सामाजिक जीवन का ज़रूरी हिस्सा बताया।
भाईचारा और एकता
उन्होंने कहा कि मुसलमान एक-दूसरे के भाई हैं और सबको एक-दूसरे की मदद करनी चाहिए।
पर्यावरण और पशुओं के प्रति दया
पैगंबर ने पेड़-पौधों की देखभाल और जानवरों पर दया करने की भी शिक्षा दी।