वहीदा रहमान हिंदी सिनेमा की सबसे सशक्त और सम्मानित अभिनेत्रियों में गिनी जाती हैं।
उन्होंने 1950–60 के दशक में अपने अभिनय से खास पहचान बनाई।
प्यासा (1957) में गुलाबो का किरदार उनके करियर का यादगार रोल माना जाता है।
कागज़ के फूल (1959) में उनके अभिनय को आज भी क्लासिक कहा जाता है।
चौदहवीं का चांद (1960) में उनकी खूबसूरती और सादगी खूब सराही गई।
साहिब बीवी और गुलाम (1962) में उनका गंभीर और भावुक अभिनय बेहद चर्चित रहा।
गाइड (1965) में रोज़ी का किरदार उनके करियर का मील का पत्थर साबित हुआ।
नील कमल, राम और श्याम और खामोशी जैसी फिल्मों में भी उन्होंने दमदार भूमिकाएं निभाईं।
वहीदा रहमान को भारतीय सिनेमा में योगदान के लिए पद्मश्री और पद्मभूषण से सम्मानित किया गया।