1. शायर भी थे अशफ़ाक़ वे सिर्फ़ क्रांतिकारी नहीं, बल्कि उर्दू के शायर भी थे। वे ‘हसरत’ उपनाम से शायरी लिखते थे। उनके भीतर साहित्य और क्रांति, दोनों का जुनून था।

2. राम प्रसाद बिस्मिल से दोस्ती मज़हब से ऊपर थी अशफ़ाक़ और बिस्मिल अलग-अलग धर्मों से थे, लेकिन दोनों का लक्ष्य एक था—भारत की आज़ादी। उनकी दोस्ती हिंदू-मुस्लिम एकता की एक ऐतिहासिक मिसाल बन गई।

3. काकोरी की कार्रवाई का मकसद निजी दौलत नहीं था 9 अगस्त 1925 को काकोरी के पास ट्रेन से सरकारी खजाना लूटने की कार्रवाई क्रांतिकारी गतिविधियों के लिए धन जुटाने के उद्देश्य से की गई थी। अशफ़ाक़ इस अभियान में शामिल थे.

4. गिरफ्तारी से बचने के लिए बदली पहचान काकोरी की घटना के बाद वे कुछ समय तक पुलिस से बचते रहे। अलग-अलग जगहों पर रहकर और छद्म पहचान अपनाकर उन्होंने अपनी गतिविधियाँ जारी रखने की कोशिश की। बाद में दिसंबर 1926 में दिल्ली में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

5. बिस्मिल के ख़िलाफ़ गवाही देने का दबाव था गिरफ्तारी के बाद उन पर सरकारी गवाह बनने और अपने साथी क्रांतिकारियों के ख़िलाफ़ बयान देने का दबाव डाले जाने का उल्लेख मिलता है। उनकी कहानी इस बात की याद दिलाती है कि क्रांतिकारी संघर्ष में साथियों के प्रति निष्ठा भी कितनी बड़ी परीक्षा थी।

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