Muhammad (हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) का पैगाम पूरी इंसानियत के लिए रहमत, अमन और इंसाफ का संदेश है।

उनका संदेश किसी एक कौम या इलाके के लिए नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए था।

उन्होंने सिखाया कि अल्लाह एक है और उसी की इबादत करनी चाहिए। इंसान को सच बोलना, वादा निभाना और दूसरों के हक़ का ख्याल रखना चाहिए।

हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया कि सबसे बेहतर इंसान वह है जो दूसरों के लिए बेहतर हो।

उन्होंने पड़ोसियों, गरीबों, यतीमों और जरूरतमंदों के साथ अच्छा व्यवहार करने की ताकीद की।

उनका पैगाम मोहब्बत और भाईचारे का था। उन्होंने नफरत, जुल्म और भेदभाव से दूर रहने को कहा। औरतों के अधिकारों की हिफाजत और इंसाफ की स्थापना पर भी उन्होंने जोर दिया।

उन्होंने यह भी सिखाया कि इल्म हासिल करना हर मर्द और औरत पर फर्ज है। सब्र, शुक्र और माफी को उन्होंने मोमिन की पहचान बताया।

संक्षेप में, उनका पैगाम यही है कि इंसान अल्लाह से जुड़ा रहे और इंसानों के साथ रहमत, इंसाफ और मोहब्बत से पेश आए।

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