सुरों की दुनिया में कुछ आवाजें ऐसी होती हैं जो सीधे दिल में उतर जाती हैं। Arijit Singh की आवाज भी उन्हीं में से एक है। आज वे करोड़ों दिलों की धड़कन हैं

लेकिन इस चमक के पीछे एक शांत और साधारण बचपन छिपा है, जो किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं लगता।

पश्चिम बंगाल के जियागंज कस्बे में जन्मे अरिजीत का बचपन सादगी में बीता। छोटा सा शहर। सीमित साधन। लेकिन घर में संगीत की गूंज हमेशा रहती थी।

उनकी मां गाती थीं। नानी शास्त्रीय संगीत से जुड़ी थीं। यही माहौल उनकी पहली पाठशाला बना। बचपन में ही उन्होंने सुरों को पहचानना शुरू कर दिया था। तबला और हारमोनियम उनके खिलौने बन गए थे।

स्कूल के दिनों में वे अलग नजर आते थे। मंच छोटा हो या बड़ा। अरिजीत गाने के लिए तैयार रहते थे। उनके लिए गाना शौक नहीं था।

यह उनका तरीका था खुद को समझने का। साल 2005 में उन्होंने एक रियलिटी शो में हिस्सा लिया। यह पहला मौका था जब देश ने उनकी आवाज सुनी।

मुंबई का सफर आसान नहीं था। छोटे काम किए। म्यूजिक प्रोग्रामिंग सीखी। स्टूडियो में घंटों बिताए। कई बार आवाज रिकॉर्ड हुई, लेकिन रिलीज नहीं हुई।

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