"और भी दुख हैं ज़माने में मोहब्बत के सिवा, राहतें और भी हैं वस्ल की राहत के सिवा।"
"मुझसे पहली सी मोहब्बत मेरे महबूब न मांग।"
"दिल ना-उम्मीद तो नहीं नाकाम ही तो है, लम्बी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है।"
"बोल कि लब आज़ाद हैं तेरे, बोल ज़बां अब तक तेरी है।"
"हम परवरिश-ए-लौह-ओ-क़लम करते रहेंगे, गर खामा-ए-जाँ और सख़्त हो जाए।"
"ये आरज़ू भी बड़ी चीज़ है मगर हमदम, विसाल-ए-यार फ़क़त आरज़ू की बात नहीं।"
"गुलों में रंग भरे बाद-ए-नौ-बहार चले, चले भी आओ कि गुलशन का कारोबार चले।"
"आए कुछ अब्र कुछ शराब आए, उसके/तेरे आने का सिलसिला भी हो।"