• सबसे पहले नीयत को साफ रखें। रोज़ा सिर्फ भूखा रहने का नाम नहीं, बल्कि अल्लाह की रज़ा के लिए हर बुराई से बचने का संकल्प है।

• पांचों वक्त की नमाज़ की पाबंदी करें। नमाज़ रोज़े की रूह को मजबूत करती है और दिल को सुकून देती है।

• क़ुरआन शरीफ़ की तिलावत करें। रमज़ान का महीना क़ुरआन का महीना है, इसलिए रोज़ थोड़ा समय तिलावत और उसके मतलब को समझने में लगाएं।

• ज़्यादा से ज़्यादा दुआ करें। इफ्तार के वक्त की दुआ खास तौर पर कबूल होने का वक्त माना जाता है।

• सब्र और अख़लाक का ख्याल रखें। गुस्सा, झूठ, चुगली और बुरी बातों से दूर रहें, क्योंकि ये रोज़े की बरकत को कम कर देते हैं।

• सदका और खैरात करें। जरूरतमंदों की मदद करना रोज़े की अहम सीख है और इससे समाज में भाईचारा बढ़ता है।

• सेहत का ध्यान रखें। सहरी में पौष्टिक खाना खाएं और इफ्तार में ज्यादा तला-भुना खाने से बचें, ताकि शरीर कमजोर न हो।

• ज़िक्र और इस्तिग़फ़ार करते रहें। अल्लाह का नाम लेना और अपने गुनाहों की माफी मांगना दिल को पाक बनाता है।

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