न्यूयॉर्क:
अमेरिका में एच-1बी (H-1B) वीजा को लेकर एक महत्वपूर्ण कानूनी फैसले में संघीय अदालत ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रस्तावित 1,00,000 डॉलर के अतिरिक्त वीजा शुल्क को अवैध करार दिया है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि आव्रजन नीति में इस तरह का बदलाव या नया शुल्क लगाने का अधिकार राष्ट्रपति के पास नहीं, बल्कि केवल अमेरिकी कांग्रेस के पास है।
यह फैसला उन अमेरिकी कंपनियों और विदेशी पेशेवरों के लिए अहम माना जा रहा है, जो लंबे समय से एच-1बी वीजा कार्यक्रम के माध्यम से अमेरिका में रोजगार के अवसर प्राप्त करते रहे हैं। विशेष रूप से भारतीय आईटी और तकनीकी क्षेत्र के हजारों पेशेवर इस वीजा श्रेणी का उपयोग करते हैं।
अदालत ने क्या कहा?
अमेरिकी जिला न्यायालय के न्यायाधीश लियो सोरोकिन ने अपने 42 पृष्ठों के फैसले में कहा कि एच-1बी वीजा पर 1,00,000 डॉलर का शुल्क वास्तव में एक प्रकार का कर (Tax) है और ऐसा कर लगाने का संवैधानिक अधिकार राष्ट्रपति को प्राप्त नहीं है।
न्यायाधीश ने कहा कि संघीय आव्रजन नीति में इस प्रकार के नियम और वित्तीय प्रावधान शामिल करने का अधिकार केवल अमेरिकी कांग्रेस के पास है। इसलिए राष्ट्रपति द्वारा लगाया गया यह शुल्क कानूनी रूप से वैध नहीं माना जा सकता।
ट्रंप ने क्यों लगाया था यह शुल्क?
डोनाल्ड ट्रंप का तर्क था कि अमेरिकी कंपनियां बड़ी संख्या में विदेशी कुशल कर्मचारियों को नियुक्त करने के लिए एच-1बी वीजा का अत्यधिक उपयोग कर रही हैं। उनके अनुसार इससे अमेरिकी नागरिकों के लिए रोजगार के अवसर प्रभावित हो रहे थे।
इसी उद्देश्य से उन्होंने इस वीजा श्रेणी पर 1,00,000 डॉलर का अतिरिक्त शुल्क लगाने का फैसला किया था, ताकि कंपनियां विदेशी कर्मचारियों की बजाय स्थानीय प्रतिभाओं को प्राथमिकता दें।
अदालत तक कैसे पहुंचा मामला?
ट्रंप प्रशासन के इस निर्णय के बाद कई डेमोक्रेटिक राज्यों के अटॉर्नी जनरल ने इसका विरोध किया और पिछले वर्ष दिसंबर में अदालत का दरवाजा खटखटाया। उनका तर्क था कि राष्ट्रपति प्रशासन ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर ऐसा फैसला लिया है।मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने याचिकाकर्ताओं की दलीलों को स्वीकार करते हुए इस शुल्क को अवैध घोषित कर दिया।
क्या है H-1B वीजा?
एच-1बी वीजा अमेरिका का एक विशेष कार्य वीजा कार्यक्रम है, जिसके तहत विदेशी कुशल पेशेवरों को विज्ञान, इंजीनियरिंग, सूचना प्रौद्योगिकी, चिकित्सा, वित्त और अन्य विशिष्ट क्षेत्रों में काम करने की अनुमति दी जाती है।इस वीजा के लिए सामान्यतः स्नातक डिग्री या उसके समकक्ष पेशेवर योग्यता आवश्यक होती है। यह वीजा प्रारंभिक रूप से तीन वर्ष के लिए जारी किया जाता है और बाद में इसे अतिरिक्त तीन वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है।
भारतीय पेशेवरों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है फैसला?
एच-1बी वीजा का सबसे अधिक लाभ भारतीय आईटी कंपनियों और तकनीकी विशेषज्ञों को मिलता है। ऐसे में अदालत का यह फैसला उन हजारों विदेशी पेशेवरों और अमेरिकी कंपनियों के लिए राहत माना जा रहा है, जो इस कार्यक्रम के माध्यम से रोजगार और प्रतिभा विनिमय पर निर्भर हैं। यह निर्णय इस बात को भी रेखांकित करता है कि अमेरिकी आव्रजन नीति में बड़े वित्तीय या कानूनी बदलाव संवैधानिक प्रक्रिया के तहत ही किए जा सकते हैं।