अफगानिस्तान की राजनीतिक हकीकत बदली, संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंध प्रणाली इसे संज्ञान में ले: भारत

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 09-06-2026
UN sanctions regime should take this into account: India
UN sanctions regime should take this into account: India

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली 

 
 भारत ने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र की मौजूदा प्रतिबंध व्यवस्था में अफगानिस्तान की बदली हुई राजनीतिक हकीकत को ध्यान में रखा जाना चाहिए और सिर्फ सजा देने के तरीकों का इस्तेमाल करने के बजाय सकारात्मक कार्यों को बढ़ावा देना चाहिए।
 
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरीश पर्वतनेनी ने कहा, “हम सकारात्मक कामों को बढ़ावा देने की अहमियत पर फिर से जोर देते हैं। पिछले पांच साल में अफगानिस्तान की राजनीतिक सच्चाई बदल गई है और संरा की मौजूदा प्रतिबंध प्रणाली को इसे ध्यान में रखना चाहिए।”
 
सोमवार को ‘अफगानिस्तान के हालात’ पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक को संबोधित करते हुए, पर्वतनेनी ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को ऐसे नीति उपकरणों जरूरत है जिनका मकसद अफगानिस्तान के लोगों को फायदा पहुंचाना हो और ‘‘नीतियों को सही दिशा में ले जाना हो, न कि सिर्फ सजा देने के तरीकों का इस्तेमाल करना हो जिनसे कम फायदा हो रहा है।”
 
तालिबान के कई नेता, जिन्होंने अगस्त 2021 में काबुल पर कब्जा कर लिया था, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 1988 की तालिबान प्रतिबंध समिति के तहत सूचीबद्ध हैं।
 
पिछले साल अक्टूबर में, तालिबान प्रतिबंध समिति ने तालिबान नेता और कार्यवाहक अफगान विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी पर लगे यात्रा प्रतिबंध में छूट को मंजूरी दी थी, जो उसी महीने बाद में भारत आए थे।
 
पर्वतनेनी ने कहा कि भारत और अफगानिस्तान के बीच करीबी सहयोग का इतिहास उनके आज के रिश्तों को दिशानिर्देशित करता रहता है।
 
उन्होंने कहा, ‘‘अफगानिस्तान के गौरवान्वित लोगों ने इस सदी में बहुत कुछ सहा है और भारत सरकार इस देश में विकास तथा स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए शांति के पक्ष में खड़ी रहेगी।’’
 
उन्होंने यह भी कहा कि अफगान लोगों के लिए भारत की क्षमता निर्माण और मानवीय सहायता पहल सभी 34 प्रांतों और 500 से अधिक विकास साझेदारी परियोजनाओं में देखी जा सकती हैं।